नरम पड़ी यमुना, बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बरकरार
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दिल्ली में बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। मंगलवार देर रात यमुना का जल स्तर इस सीजन के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद नीचे गिरने लगा है। आपदा प्रबंधन विभाग का मानना है कि हथिनी कुंड बैराज से सामान्य मात्रा में पानी छोड़े जाने से बृहस्पतिवार को भी जलस्तर में गिरावट दर्ज होने की संभावना है।
वहीं, खादर क्षेत्र लोगों की मुसीबत अब भी कम नहीं हुई है। पानी उतरने के बाद लोगों को जलजनित बीमारियों का खतरा सता रहा है। हालांकि, दिल्ली सरकार का कहना है कि राहत कैंपों के लिए रसद व दवाओं के पर्याप्त इंतजाम है। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दरअसल, लगातार उफान पर चल रही यमुना का जलस्तर मंगलवार देर रात करीब एक बजे 205.86 मीटर पर पहुंच गया था। इस सीजन का अब तक का सबसे उच्चतम जलस्तर था। इसके बाद जल स्तर में गिरावट दर्ज की गयी।
राहत कैंप में बेघर, मुसीबत बरकार
सुबह करीब आठ बजे यह 205.15 पर पहुंच गया। बुधवार दिन भर जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई। रात करीब नौ बजे यह 204. 59 मीटर पर पहुंच गया था। अधिकारी बताते हैं कि हथिनीकुंड से अब सिर्फ 5-10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जल स्तर में अब गिरावट होने की संभावना है।
राहत कैंप में बेघर, मुसीबत बरकार
यमुना का जलस्तर नीचे जाने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों की समस्या कम नहीं हुई है। अब भी पीड़ित यमुना पुश्ता पर बने राहत कैंपों में डेरा जमाए हुए हैं। अब तक 13, 915 लोगों को 1,461 तंबुओं और अस्थायी शिविरों में रखा गया है।
बाढ़ उतरने व तापमान बढ़ने से जलजनित बीमारियों के पांव फैलाने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, अधिकारियों को कहना है कि प्रशासन की तरफ से इंतजाम पर्याप्त हैं। डेंगू ,मलेरिया की रोकथाम के लिए लगातार फोगिंग हो रही है।