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Delhi NCR News: सोनिया गांधी की मतदाता सूची मामले में फैसला टला, 21 सितंबर को आएगा आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
द्वारका कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप से जुड़े मामले में शनिवार को अपना फैसला टाल दिया। कोर्ट अब 21 सितंबर को उस पुनर्विचार याचिका पर आदेश सुनाएगा, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। यह याचिका विकास त्रिपाठी ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया था। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद त्रिपाठी ने इस फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी। सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा और अधिवक्ता तरन्नुम चीमा ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेज सही नहीं हैं। वहीं, त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बर्मन ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय नागरिक बनने से पहले सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुआ। इस मामले में कोर्ट ने पहले भी सवाल उठाया था कि साल 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले उनका नाम मतदाता कैसे बन गया। सोनिया गांधी के वकील ने इसे बिना ठोस आधार की जांच बताया था। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि फर्जी दस्तावेज या धोखाधड़ी के बिना ऐसा होना संभव नहीं है। कोर्ट ने 25 जुलाई को आदेश सुरक्षित रखा था। शनिवार को आदेश सुनाया जाना था, लेकिन अब इसे 21 सितंबर तक टाल दिया गया है।
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नई दिल्ली।
द्वारका कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप से जुड़े मामले में शनिवार को अपना फैसला टाल दिया। कोर्ट अब 21 सितंबर को उस पुनर्विचार याचिका पर आदेश सुनाएगा, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। यह याचिका विकास त्रिपाठी ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया था। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद त्रिपाठी ने इस फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी। सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा और अधिवक्ता तरन्नुम चीमा ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेज सही नहीं हैं। वहीं, त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बर्मन ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय नागरिक बनने से पहले सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुआ। इस मामले में कोर्ट ने पहले भी सवाल उठाया था कि साल 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले उनका नाम मतदाता कैसे बन गया। सोनिया गांधी के वकील ने इसे बिना ठोस आधार की जांच बताया था। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि फर्जी दस्तावेज या धोखाधड़ी के बिना ऐसा होना संभव नहीं है। कोर्ट ने 25 जुलाई को आदेश सुरक्षित रखा था। शनिवार को आदेश सुनाया जाना था, लेकिन अब इसे 21 सितंबर तक टाल दिया गया है।
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