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Qutub Minar Case: कुतुब मीनार पर मालिकाना हक का दावा करने वाले आवेदन पर 17 को फैसला, आदेश रखा गया सुरक्षित

Tue, 13 Sep 2022 09:26 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 13 Sep 2022 09:26 PM IST
सार

अदालत ने हस्तक्षेप करने वाले अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से पेश अधिवक्ता सुभाष गुप्ता का पक्ष सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार शनिवार 17 सितंबर को शाम चार बजे आदेश पारित करेंगे।

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Decision on 17th september on application claiming ownership of Qutub Minar
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली की एक अदालत ने कुतुब मीनार में पूजा के अधिकार की याचिकाओं के बीच में कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन में आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें आगरा से यमुना और गंगा नदी के बीच मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर और गुड़गांव वाले क्षेत्रों पर अधिकार की मांग की गई है। उन्होंने कुतुब मीनार परिसर में कथित मंदिरों के जीर्णोद्धार की मांग करने वाली अपीलों के संबंध में यह आवेदन दायर किया है।

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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार शनिवार 17 सितंबर को शाम चार बजे आदेश पारित करेंगे। अदालत ने हस्तक्षेप करने वाले अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से पेश अधिवक्ता सुभाष गुप्ता का पक्ष सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। एएसआई ने तर्क दिया है कि हस्तक्षेप आवेदन इस कारण से खारिज करने योग्य है कि महेंद्र सिंह ने विशेष रूप से अपील में किसी भी अधिकार का दावा नहीं किया है और उनके पास पक्ष के रूप में पक्षकार होने का कोई अधिकार नहीं है।

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एएसआई ने आगे तर्क दिया था कि सिंह ने बड़े और विशाल क्षेत्रों के अधिकारों का दावा किया है। एएसआई ने दावा किया कि पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुल्ताना बेगम द्वारा दायर एक समान याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें लाल किले पर अपना हक होने का दावा किया गया था। उसमें उन्होंने खुद को अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वितीय के परपोते की विधवा होने का दावा किया था। अदालत का दरवाजा खटखटाने में अत्यधिक देरी होने के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गई। अभियोग आवेदन के बारे में आवेदक ने कहा कि हस्तक्षेपकर्ता बेसवान परिवार से है, जो राजा रोहिणी रमन धवज प्रसाद सिंह का उत्तराधिकारी है, जिनकी मृत्यु वर्ष 1950 में हुई थी। आवेदन के अनुसार बेसवान परिवार के रूप में जाना जाने वाला परिवार मूल रूप से राजा नंद के वंशज जाट थे।

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