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नहीं हटाया मलबा, मजदूरों के दबे होने की आशंका

Tue, 02 Dec 2014 12:59 PM IST
अमर उजाला, लोनी
अमर उजाला, लोनी Updated Tue, 02 Dec 2014 12:59 PM IST
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Debris removed, workers feared to be buried.
ट्रॉनिका सिटी के अपेरल पार्क में मजदूरों की कब्रगाह बनी गारमेंट्स फैक्ट्री का निर्माण अवैध रूप से किया जा रहा था। न ही यूपीएसआईडीसी से नक्शा पास था और न ही श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया गया था।
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मौके पर पहुंची एनडीआरएफ टीम जांच के बाद मलबे में और मजदूरों के दबे होने की आशंका से इंकार करते हुए रेस्क्यू बंद कर देर रात लौट गई। उधर, हादसे में घायल एक मजदूर की हालत गंभीर है।
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पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान की शिकायत पर फैक्ट्री मालिक, सेटरिंग एवं लेंटर ठेकेदार के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

सोमवार को एसडीएम, श्रम विभाग के इंस्पेक्टर व सुरक्षा विंग के अधिकारियों ने मुआयना किया। मलबे में कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने ऐसी आशंका से साफ इनकार किया।
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अपेरल पार्क के भूखंड संख्या बी-5 पर कबीर नगर गांधीनगर दिल्ली निवासी चुन्ने खां होनेक्स गारमेंट्स के नाम से फैक्ट्री का निर्माण करा रहा था।

दस हजार वर्ग मीटर के भूखंड पर करीब दो हजार वर्ग मीटर में शनिवार से लेंटर डालने का काम चल रहा था। करीब सौ मजदूर काम पर लगे थे।

रविवार शाम 5.30 बजे अचानक निर्माणाधीन लेंटर का एक हिस्सा गिर गया, जिसमें कई मजदूर दब गए थे। घटना के बाद फैक्ट्री मालिक चुन्ने खां, सेटरिंग ठेकेदार जफरुदीन एवं लेंटर ठेकेदार इजराइल पुलिस को सूचना दिए बिना ही मौके से भाग गए थे।

इसके बाद वहां काम कर रहे 50-60 मजदूर भी ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठकर चले गए। हादसे के दौरान मजदूर संजय ने कूदकर जान बचाई। जबकि उसके ममेरे भाई प्रमोद शर्मा (24) और मोहन (29) मलबे में दब गए थे।

पुलिस ने अगरौला गांव के लोगों और डेरा सच्चा सौदा के वालंटियर्स की मदद से दोनों को मलबे से निकाल अस्पताल में भर्ती कराया। प्रमोद की जीटीबी में मौत हो गई, जबकि मोहन कस्बे के शिवेन अस्पताल में भर्ती है।


डीएम, एसएसपी सहित जनपद के कई थानों का फोर्स मौके पर पहुंचा तथा एनडीआरएफ टीम को बुलाया। रविवार रात 9.30 बजे एनडीआरएफ टीम का रेस्क्यू आपरेशन शुरू हुआ।

कई घंटे की जांच के बाद एनडीआरएफ टीम ने मलबे में और मजदूरों के दबे होने की आशंका से इंकार कर दिया तथा सुबह तीन बजे वापस लौट गई।

निगम ने किया ब्याज माफ
चुन्ने खां पर यूपीएसआईडीसी का करीब तीन करोड़ 31 लाख रुपये प्रीमियम, लीज रेंट, ब्याज व मेंटीनेंस का बकाया था। निगम से ब्याज माफी के बाद भी उस पर निगम का 2.38 करोड़ बकाया है।
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