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हिरासत में मौत का मामला:पुलिस की कहानी में हैं कई झोल
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Wed, 19 Aug 2015 06:02 PM IST
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हिरासत में युवक की मौत के मामले में क्राइम ब्रांच डीएलएफ पुलिस खुद ही अपनी कहानी में उलझती नजर आ रही है। हिरासत से लेकर मौत तक कई बिंदुओं पर पुलिस अधिकारी विरोधाभासी बयान दे रहे हैं।
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परिजनों ने भी पुलिस पर दो भाइयों को पांच दिन पहले दिल्ली से उठाकर लाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मृत्यु के कारण स्पष्ट न होने की वजह से विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए पीजीआई रोहतक और एफएसएल मधुबन भेजा गया है।
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मालूम हो कि 18 अगस्त को तड़के करीब चार बजे डीएलएफ क्राइम ब्रांच पुलिस मदन नाम के युवक को सिविल अस्पताल लेकर आई थी। डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया था।
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क्राइम ब्रांच के हेड कांस्टेबल संदीप ने बताया था कि मदन को रात 12:40 बजे सेक्टर 37 बाईपास रोड से पकड़ा गया था। हेड कांस्टेबल संदीप की लिखित तहरीर में यह सभी बातें दर्ज हैं लेकिन मदन को अस्पताल तक जिंदा पहुुुंचाने और इलाज के दौरान मौत होना बताया गया है। जबकि सिविल अस्पताल के रुक्का रजिस्टर में मदन को मृत अवस्था में लाया गया (ब्रॉट डेड) अंकित है।
हेड कांस्टेबल संदीप और अन्य पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को दावा किया था कि मदन को रात 12:40 बजे सेक्टर 37 बाईपास रोड से पकड़ा गया था। जबकि तहरीर में संदीप ने बताया है कि मदन को दिल्ली में दौरा (खोजबीन) करते वक्त पकड़ा गया था।
पुलिस ने 18 अगस्त की रात को मदन को अकेले ही पकड़ने का दावा किया है। पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंची मुनीरका, दिल्ली निवासी मां प्रेमा का कहना है कि पुलिस ने पांच दिन पहले मदन और उसके भाई रामसिंह को मुनीरका में फूल बेचते समय दिन दहाड़े उठाया था।
रोते हुए प्रेमा ने कहा कि दूसरा बेटा रामसिंह कहां और किस हालत में है पुलिस इसकी जानकारी नहीं दे रही है। परिजनों के पहुंचने पर बुधवार को तीन डॉक्टरों के पैनल ने मदन के शव का पोस्टमॉर्टम किया।
पोस्टमॉर्टम में मृत्यु के कारण स्पष्ट न होने पर विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए एफएसएल मधुबन और पीजीआई रोहतक भेजा गया है। मामले की जांच कर रहे न्यायिक मजिस्ट्र्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) खत्री सौरभ ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपेंगे।
तो क्या हिरासत में लगी थीं चोटें
मां प्रेमा, बहन लाडो और अन्य परिजनों का दावा है कि पुलिस मदन और रामसिंह को पांच दिन पहले मुनीरका से उठा कर लाई थी। मदन के हाथ पांव और पीठ में छिलने के तीन चार दिन पुराने घाव पाए गए हैं।
यदि मदन के परिजनों का दावा सही है तो इसका अर्थ हुआ कि उसे यह चोटेें हिरासत के दौरान लगीं थीं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मजिस्ट्रेटी जांच में इन सभी तथ्यों को परखा जाएगा।