'सास-ससुर की संपत्ति में पुत्रबधु का कोई अधिकार नहीं'
दिल्ली कए अदालत ने सास-ससुर और बहू के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर एक फैसला सुनाया है। इसके तहत अदालत ने एक महिला को उसके सास-ससुर के मकान में रहने के अधिकार से वंचित कर दिया गया।
सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश निरस्त करते हुए महिला के ससुर की ओर से दायर अपील स्वीकार कर ली और कहा कि उसका अपने ससुर की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है।
अदालत के फैसले मुताबिक कोई महिला को उसी संपत्ति में अपना दावा कर सकती है, जो उसके पति की हो, या फिर उसके पति का हिस्सा हो। अदालत ने महिला के आवास के अधिकार के दावे पर नए सिरे से विचार करने के लिए मामला वापस मजिस्ट्रेट अदालत के पास भेज दिया है।
'बहू के अलग रहने पर दहेज की मांग असंभव नहीं'
बेटा-बहू माता पिता से अलग रहते हैं, केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि दहेज की मांग नहीं की गई। अदालत ने यह कहते हुए पीड़िता की सास को राहत देने से इंकार कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए राहत देने से इंकार कर दिया। निचली अदालत ने महिला के खिलाफ दहेज प्रताड़ना संबंधी धाराओं में आरोप तय किए थे।
पीड़िता की सास ने याचिका दायर कर कहा था कि उसकी बहू 2009 से पति के साथ अलग रह रही है, इसलिए दहेज की मांग का सवाल ही नहीं उठता।