अमानवीय हैं मानव चालित रिक्शा, इन्हें दिल्ली की सड़कों से तुरंत हटाएं
इनकी जगह पर छोटी ई रिक्शा लाएं, दिल्ली सरकार की कमेटी ने की सिफारिश
जाम का कारण बन रहे ई रिक्शा की संख्या सीमित की जाए
सिर्फ स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस पर ही परमिट देने की सिफारिश
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राजधानी की सड़कों पर मानव चालित रिक्शा न सिर्फ सड़कों पर जाम के कारण बन रहे हैं बल्कि यह अमानवीय भी है। इसे सड़कों से हटाकर इसकी जगह छोटे ई-रिक्शा को लाना चाहिए। यह सिफारिश दिल्ली सरकार की एक कमेटी ने दिया है, जिसका गठन हाईकोर्ट के निर्देश पर किया गया था।
इसके अलावा कमेटी ने ऑटो परमिट की तरह ई-रिक्शा की संख्या भी सीमित करने की सिफारिश की है। इसी वर्ष जनवरी में हाईकोर्ट ने राजधानी में तेजी से बढ़ते ई-रिक्शा को लेकर एक कमेटी का गठन करके नीति बनाने को कहा था।
दिल्ली सरकार ने बीते मार्च में स्थानीय निकायों के उच्चाधिकारियों, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, बिजली वितरण कंपनियों, शहरी विकास विभाग व परिवहन विभाग के अधिकारियों को शामिल कर एक कमेटी का गठन किया था।
कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि जून तक दिल्ली में 34 हजार ई-रिक्शा रजिस्टर्ड थे, जबकि इससे ज्यादा बगैर पंजीकृत हैं। कमेटी ने माना कि दिल्ली में सड़कों पर खड़े ई-रिक्शा परिवहन व्यवस्था को सुधारने के बजाय जाम का कारण बन रहे हैं और दूसरे परिवहन माध्यमों को इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
एक बार और मौका मिलना चाहिए
इसके अलावा उन्होंने मानव चालित रिक्शा से होने वाली समस्या का जिक्र करते हुए उसे तुरंत सड़कों से हटाने को कहा है। उसे अमानवीय भी बताया है। कमेटी ने सिफारिश की है कि सड़क पर वाहनों की भीड़ कम करने के लिए ई-रिक्शा की संख्या सीमित कर देना चाहिए।
वर्तमान में परिवहन विभाग लर्निंग लाइसेंस वालों को भी परमिट जारी करती है जबकि सिर्फ स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) ही दिया जाना चाहिए। ड्राइवर के बगल में यात्री को बैठाने को मंजूरी न मिले।
पीएसवी बैज भी इनके लिए अनिवार्य किया जाए। कमेटी ने यह भी कहा है कि पुराने ई-रिक्शा अक्तूबर 2014 से पहले जिन्हें पंजीकरण कराने के लिए दिसंबर 2016 तक का समय मिला था। उन्हें एक बार और मौका मिलना चाहिए।