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दिल्ली की सियासत में लगा बिजली का करंट, आप और भाजपा ने थपथपाई अपनी पीठ
Thu, 01 Aug 2019 06:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 01 Aug 2019 06:36 AM IST
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विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली की सियासत में सस्ती बिजली ने तगड़ा झटका लगाया है। दिल्ली विद्युत विनियामक प्राधिकरण (डीईआरसी) का फैसला आते ही आम आदमी पार्टी (आप) व भाजपा में श्रेय लेने की होड़ लग गई। उधर, कांग्रेस ने फिक्स चार्ज खत्म करने की मांग करते हुए उपभोक्ताओं के बिजली मद में लिए गए पहले के पैसे को लौटाने की मांग की।
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दरसअल, दिल्ली की चुनावी सियासत में बिजली की कीमतें बड़ा मुद्दा रही हैं। पार्टी गठित करने के साथ ही आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने 2013 में बिजली आंदोलन किया था। बिजली की बढ़ती कीमतों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को जिम्मेदार बताते हुए केजरीवाल ने इसकी जांच कराने की मांग की थी।
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बिजली बिल जलाने के साथ केजरीवाल उन उपभोक्ताओं केा कनेक्शन जोड़ने के लिए बिजली के खंभों पर चढ़े थे जिनकी सप्लाई निजी कंपनियों ने काट दी थी। 2014 में आप के चुनावी सफलता में बिजली आंदोलन की अहम भूमिका थी। आप सरकार ने सब्सिडी देकर बिजली सस्ती भी की।
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हालांकि बाद में बिजली की कीमतों में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी नहीं हुई थी, लेकिन करीब सवा साल पहले डीईआरसी ने फिक्स चार्ज बढ़ा दिए थे। चूंकि सब्सिडी बिजली की यूनिट पर दी जाती है, इसलिए फिक्स चार्ज का भार सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ा। इससे आम उपभोक्ताओं का बिल 200-1500 रुपये के बीच बढ़ गया था।
इसके बाद से भाजपा व कांग्रेस दिल्ली सरकार पर आक्रामक थी। वहीं, सत्ता में होने से आप इस मसले में बैकफुट पर थी। विधानसभा चुनाव से पहले डीईआरसी के फैसले ने एक बार फिर दिल्ली की सियासत को झटका दिया है।
तीनों दलों के अध्यक्षों का डीईआरसी के फैसले पर बयान:
लगातार पांच सालों से दिल्ली के बिजली के बिल नहीं बढ़े हैं। इसकी जगह बिलों में कमी आई है। दिल्ली में बिजली सबसे सस्ती है। इसके साथ बिजली की आपूर्ति भी 24 घंटे रही है।
अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली
अरविंद केजरीवाल ने फिक्स चार्ज और लोड घटाकर अपनी गलती मान ली है। साथ ही उन्होंने यह भी माना है कि बिजली कंपनियों ने दिल्ली को लूटा है। अब सवाल यही है कि बिजली कंपनियों के माध्यम से लूट गए करीब सात हजार करोड़ रुपये केजरीवाल कब वापस दिलाएंगे।
मनोज तिवारी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
बिजली बिलों पर लगाए गए शुल्कों को पूरी तरह से वापस लिया जाए। साथ ही पिछले करीब सवा साल से वसूले गए करोड़ों रुपये बिजली उपभोक्ताओं को वापस लौटाए जाए। इसे उपभोक्ताओं के अगले 6 महीने के बिजली के बिलों में समायोजित भी किया जा सकता है।
हारुन यूसुफ, कार्यकारी अध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस