CRPF में कोरोना से पहली मौत, सब-इंस्पेक्टर हुसैन खुद बोले थे, देखो, मुझे कोरोना तो नहीं हो गया
खास बात है कि 55 वर्षीय इकराम हुसैन ने आरके पुरम स्थित सीआरपीएफ के डीजी स्टाफ कैंप अस्पताल में खुद जाकर बोला था, डॉक्टर साहब, मुझे बुखार है, खांसी है और नाक बह रही है। सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जल्द चेक कर लो, कोरोना तो नहीं हो गया है।
डॉक्टरों ने उनका सेंपल लेकर जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इसके बाद सीआरपीएफ ने डीजी स्टाफ कैंप अस्पताल को बंद करने का आदेश जारी कर दिया था। अस्पताल के सभी कर्मियों को क्वारंटीन में भेज दिया गया है।
पिछले शुक्रवार को सुबह दस बजे इकराम हुसैन आरके पुरम में डीजी स्टाफ कैंप अस्पताल आए थे। इससे पहले कि डॉक्टर कुछ कहते, हुसैन ने खुद ही सारी बात कह दी। उस वक्त उनके शरीर का तापमान 101 से अधिक था।
बिना कोई देरी किए हुसैन का कोरोना टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट में साफ हो गया कि हुसैन को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया। उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट आते ही बटालियन के करीब तीन दर्जन से अधिक जवानों को नरेला स्थित क्वारंटीन सेंटर पर भेजा गया।
सभी यूनिटों में विशेष सावधानी बरतने के आदेश
हैरानी की बात ये रही कि वहां जब 11 कर्मियों के सेंपल लेकर कोरोना की जांच की गई, तो उनमें से 9 जवानों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इनमें भी एक सब-इंस्पेक्टर और एक हवलदार शामिल है। इसके बाद मयूर विहार स्थित 31वीं बटालियन में कोरोना को लेकर विशेष चौकसी बरती गई।
यहां पर कोरोना के कई पॉजिटिव केस आ चुके हैं। चार-पांच दिन पहले ही सिपाही राजेश शर्मा की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। सीआरपीएफ ने इस बटालियन के सभी कर्मियों से कहा है कि वे बताएं और उन लोगों की सूची बनाएं, जो उनके संपर्क में आए हैं।
साथ ही नरेला क्वारंटीन सेंटर में भेजे गए जवानों से भी यही बात पूछी जा रही है। बल ने अपनी सभी यूनिटों में विशेष सावधानी बरतने के आदेश जारी किए हैं। किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में न आने की बात कही गई है।
सीआरपीएफ को बंद करना पड़ा था अपना अस्पताल
कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को अपना अस्पताल करना बंद करना पड़ा था। वजह, यहां के डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ ने इकराम हुसैन की कोरोना जांच की थी।
उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। नतीजा, अस्पताल के समस्त मेडिकल स्टाफ को क्वारंटीन में भेज दिया गया। चूंकि अब अस्पताल में कोई नहीं बचा था तो उसे आगामी आदेशों तक उसे बंद कर दिया गया है।