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सोशल मीडिया पर अपनों का शिकार हो रहीं महिलाएं
अमित सिंह/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 07 Oct 2017 09:38 AM IST
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सोशल मीडिया एक तरफ अभिव्यक्ति और सामाजिक दायरा बढ़ाने की आजादी देता है तो वहीं कई बार कुछ लोगों के लिए बड़ा खतरा भी बन जाता है। विशेष तौर पर महिलाओं के लिए। सोशल मीडिया पर महिलाओं के प्रोफाइल पर आपत्तिजनक पोस्ट और उनकी फर्जी प्रोफाइल बनाने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।
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इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इस तरह के 90 फीसदी मामलों में आपत्तिजनक पोस्ट या फर्जी प्रोफाइल बनाने वाला कोई जानकार ही होता है। इतना ही नहीं साइबर क्राइम के इस मामले का शिकार होने वाली 50 फीसदी पीड़िताओं को उनके फर्जी प्रोफाइल या आपत्तिजनक पोस्ट की जानकारी काफी देरी से मिलती है।
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इन्हें अक्सर इनके सोशल मीडिया के दोस्त इस संबंध में जानकारी देते हैं। मतलब पीड़िता जब तक पुलिस या सोशल मीडिया से शिकायत कर कोई कार्रवाई करती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
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अनजान फोन कॉल से पता चला फर्जी प्रोफाइल का
नोएडा के सेक्टर-27 में पति से अलग रहने वाली एक महिला का फेसबुक पर अश्लील प्रोफाइल बनाने का मामला कुछ दिनों पहले सामने आया था। किसी ने महिला के फेसबुक से उसकी फोटो लेकर उसका एक फर्जी अश्लील प्रोफाइल बना दी थी। इस फर्जी प्रोफाइल पर महिला का मोबाइल नंबर भी डाल दिया गया था। इसके बाद महिला को अनजान नंबरों से ऊटपटांग फोन आने शुरू हो गए। ऐसे ही एक नंबर पर महिला ने जब कॉलर को पुलिस से शिकायत करने की चेतावनी दी, तो उसने बताया कि फेसबुक पर उसका अश्लील प्रोफाइल बना है। उसे वहीं से उसका नंबर मिला था। इसके बाद महिला ने साइबर क्राइम सेल में शिकायत की। जांच में फर्जी प्रोफाइल बनाने वाला उसका एक पड़ोसी निकला था।
ब्लैकमेल करने के लिए भी बनाते हैं फर्जी प्रोफाइल
नोएडा साइबर क्राइम सेल के प्रभारी निरीक्षक विवेक रंजन राय के मुताबिक सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाने का मकसद संबंधित शख्स को बदनाम करना होता है। कई बार इसे ब्लैकमेल करने के लिए भी बनाया जाता है। इस तरह के मामलों में पीड़िता को काफी नुकसान होता है, क्योंकि आरोपी उसके बारे में बहुत कुछ जानता है।
सोशल मीडिया कंपनियों से नहीं मिलती जानकारी
इस तरह के मामलों में पुलिस के सामने जांच में सबसे बड़ी चुनौती होती है कि फेसबुक, व्हाट्स ऐप, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उन्हें आसानी से ब्योरा उपलब्ध नहीं कराते हैं। ऐसे बहुत से मामले हैं, जिन मामलों में साइबर सेल द्वारा संबंधित सोशल मीडिया को कई बार ई-मेल करने पर भी उनकी तरफ से पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। काफी प्रयास करने पर संबंधित प्रोफाइल को बंद कर दिया जाता है।
पुलिस बल और संसाधनों की कमी
साइबर क्राइम के मामलों में परेशानी तकनीकी ही नहीं व्यावहारिक भी है। दरअसल, नोएडा जैसे हाईटेक शहर में भी सोशल मीडिया की अच्छी जानकारी रखने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या काफी कम है। इसके अलावा साइबर क्राइम के मामलों की जांच के लिए केवल इंस्पेक्टर या उनसे सीनियर रैंक के अधिकारी ही अधिकृत हैं। नोएडा साइबर सेल में केवल एक इंस्पेक्टर हैं, जबकि यहां प्रतिदिन पांच-छह शिकायतें आती हैं। अगर किसी मामले में आरोपी का पता लग जाए तो उसे पकड़ने, तलाश करने या दबिश देने के लिए भी साइबर सेल के पास पर्याप्त पुलिस बल व संसाधन उपलब्ध नहीं है।
जानकारी का अभाव है मुख्य वजह
यूपी एसटीएफ के एसपी व साइबर क्राइम विशेषज्ञ डॉ. त्रिवेणी सिंह के अनुसार सोशल मीडिया की रेस में शामिल होने की होड़ मची है। बहुत से लोग सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बना लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसे देखते भी नहीं हैं। ज्यादातर यूजर्स को साइट पर मौजूद सुरक्षा विकल्पों की जानकारी ही नहीं होती है। ऐसे में इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रति लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। स्कूल-कॉलेज इसका अच्छा माध्यम हो सकते हैं।
कैसे करें बचाव
- बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखें।
- सोशल मीडिया अकाउंट पर अपना पूरा (मिडिल या लास्ट) नाम, घर का पता, मोबाइल नंबर, व्यक्तिगत ई-मेल आईडी आदि न लिखें। इससे आपकी पहचान चोरी होने का खतरा होता है।
- सोशल मीडिया पर मजबूत प्राइवेसी सेंटिंग रखें। इससे अनजान व्यक्ति, जो आपकी फ्रैंड लिस्ट में नहीं है आपका प्रोफाइल नहीं देख सकेगा।
- अपनी सही लोकेशन या घर में अकेले होने की जानकारी बिल्कुल शेयर न करें।
- आपत्तिजनक पोस्ट की तुरंत वेबसाइट पर शिकायत करें। सभी सोशल साइट्स पर इसका विकल्प मौजूद रहता है।
- बेहतर पासवर्ड बनाएं, जिसमें शब्द, अंक और विशेष साइन का इस्तेमाल करें।
- सोशल मीडिया पर कोई ऐसी चोज पोस्ट न करें जो भविष्य में आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती हो।
- लॉग इन अलर्ट और टू स्टेप लॉग इन विकल्प का चुनाव करें।
- उन्हीं सोशल वेबसाइट पर अकाउंट बनाएं, जिन्हें आप नियमित देख या प्रयोग कर सकें। प्रयोग न होने वाले सोशल मीडिया अकाउंट को डिलीट कर दें।
- अकाउंट रिकवरी के लिए उन सुरक्षा सवालों का चुनाव न करें, जिसकी जानकारी आपकी प्रोफाइल पर न हो। आप खुद अपना सुरक्षा सवाल भी तैयार कर सकते हैं।
नोएडा साइबर सेल को इस वर्ष प्राप्त शिकायतें
सोशल मीडिया क्राइम
फेसबुक - 205
व्हाट्स ऐप - 17
आपत्तिजनक कॉल या मैसेज - 15
अन्य अपराध - 184