पत्नी के सुसाइड नोट ने खोला ऐसा राज कि पति को कोर्ट ने मान लिया निर्दोष
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पत्नी पर क्रूरता और दहेज के लिए परेशान करने का आरोप और मुकदमा झेल रहे पति को पत्नी के सुसाइड नोट के चलते राहत मिली है। मुकदमे की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज जैन ने माना कि महिला की मृत्यु आत्महत्या की वजह से हुई है। इस मामले में पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य को सही नहीं माना जा सकता।
अदालत में पेश किए गए सुसाइड नोट से पता चलाता है कि महिला को अपने पति से कोई शिकायत नहीं थी। महिला के अनुसार, उसका पति पूरी तरह से उसका सहयोग करता था, लेकिन वो अपने पति का पूरा सहयोग नहीं कर पाती थी और परा दिन रोती रहती थी।
वह अपने शरीर से बहुत परेशान हो चुकी थी। उसने सुसाइड नोट में स्पष्ट तौर पर लिखा था अगर उसे कुछ होता है तो उसके पति को इसके लिए जिम्मेदार न ठहराया जाए और उसके बच्चों को भी पति के साथ ही रहने दिया जाए।
27 अप्रैल, 2013 को पति ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है और दरवाजा भी नहीं खोल रही है। घटनास्थल पर पहुंच पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो महिला का शव पंखे से लटका पाया गया।
पति पर लगे थे ये आरोप
जांच में पुलिस ने महिला के पति और उसके परिवारवालों को आरोपी बनाया लेकिन उसके पति को छोड़कर सभी को बरी कर दिया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यह स्पष्ट नहीं है कि सुसाइड नोट में मृतका की ही लिखावट है।
पति पर चालाकी से नाटक रचने और सुसाइड नोट की कहानी तैयार करने का भी आरोप लगाया गया। अदालत से आग्रह किया गया कि वो इस तथ्य की अनदेखी न करें।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो महिला की हत्या का संकेत देता हो और स्पष्ट करता हो कि ये सुसाइड नहीं था। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या की कोई बात नहीं बताई गई है।
महिला ने सुसाइड नोट में यह कहा था कि वह अपने बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ है और वह उनसे दूर जा रही है। अदालत ने कहा कि सुसाइड नोट से यह पता चलता है कि यह एक आत्महत्या ही है जिसके लिए उसके पति को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।