जेवर कांड: ...तो क्या इसलिए उठ रहे सीबीआई जांच पर सवाल
हेडिंग: जेवर कांड के सातवें दिन ढूंढा था दरिंदगी का गुरुग्राम लिंक
जेवर-गुरुग्राम की वारदातों की समानता का 1 जून को अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
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दरिंदगी और हैवानियत की जिन वारदातों के खुलासे को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। उनके तार जेवर कांड के एक सप्ताह बाद ही जुड़ गए थे। 28 जनवरी को गुरुग्राम के मंदपुरा और 29 मई को पटौदी में हुई जेवर कांड से मिलती-जुलती वारदात को लेकर अमर उजाला संवाददाता ने स्थानीय एसएसपी को इसकी जानकारी दी थी।
इस पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी लवकुमार ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क साधने की बात कही थी। इस पूरे मामले का समाचार अमर उजाला में 1 जून को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। 24 मई को हुई जेवर कांड को लेकर स्थानीय पुलिस बेहद उलझी हुई थी।
तीन जिलों की पुलिस टीमें वारदात के खुलासे के प्रयास में जुटीं थीं। संगीन वारदात को लेकर पुलिस पर खासा दबाव था। इसके बावजूद पुलिस बदमाशों का सुराग नहीं लगा पा रही थी। इसी बीच 29 मई को गुरुग्राम के पटौदी इलाके में इसी तरह की सनसनीखेज वारदात हुई।
दोनों वारदात में काफी समानताएं
वहां अस्पताल से परिवार के सदस्य का शव लेकर लौट रही महिला व उसकी बेटी के साथ एक्सल फेंककर एंबुलेंस रोकने के बाद लूटपाट की वारदात की गई थी। इससे पहले गुरुग्राम में ही 28 जनवरी को मंदपुरा बदमाशों ने देर रात को एक कंपनी में धावा बोलकर लूटपाट की थी और कर्मचारियों के परिवार की दो महिलाओं से दुष्कर्म किया था।
जेवर कांड और इन दोनों वारदात में काफी समानताएं थीं। इसके चलते एसएसपी लवकुमार को दोनों वारदातों की जानकारी दी गई थी। इस पर एसएसपी ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क साधकर जांच करने की बात कही थी।
अब, मंदपुरा के आरोपियों के ही डिंगरहेड़ी, जेवर कांड समेत इस तरह की 40 वारदात कबूली गईं हैं। उस दौरान हरियाणा और यूपी पुलिस बेहतर तालमेल दिखाकर काम करतीं तो वारदातों के खुलासे को लेकर इस तरह के सवाल नहीं उठते।