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पहले गायब कर दीं फाइलें, फिर साथी से मांगी रिश्वत
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 12 Jun 2014 01:08 AM IST
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अभी तक आवंटियों से रिश्वत वसूलने वाले जीडीए बाबू साथी कर्मचारियों को भी नहीं बख्श रहे। बुधवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया, जिसमें जीडीए के दो बाबुओं ने पहले तो एक बाबू की कस्टडी में रखीं कई व्यावसायिक संपत्तियों की फाइलें गायब कर दीं। बाद में फाइलें वापस करने के नाम पर साथी बाबू से रिश्वत मांगने लगे।
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बाबू ने रिश्वत मांगने की रिकार्डिंग कर ली और जीडीए वीसी से मामले की शिकायत की। जीडीए वीसी ने गोपनीय तरीके से मजिस्ट्रेट की अगुवाई में आरोपी बाबुओं के घरों पर रेड कराई। रेड में एक बाबू के घर से फाइलें बरामद हो गईं। दोनों बाबुओं के खिलाफ सिहानी गेट थाने में एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
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पकड़े गए बाबुओं में एक संजीव शर्मा के खिलाफ साथी महिला बाबू का यौन शोषण करने की कोशिश संबंधी जांच चल रही है। जीडीए लिपिक प्रदीप कुमार गुप्ता ने सिहानी गेट में एफआईआर दर्ज कराई है।
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बकौल प्रदीप गुप्ता वह 2007 से 2013 के बीच जीडीए के व्यावसायिक अनुभाग में द्वितीय श्रेणी लिपिक के पद पर तैनात रहा है। इस दौरान लिपिक संजीव नागरथ और मदनपाल राणा ने चार व्यक्तियों को बेचे गए भूखंड को दो व्यक्तियों के नाम परिवर्तित कर दिया गया।
शासन को वित्तीय क्षति पहुंचाते हुए भूखंड संख्या-बी-3, कविनगर की फाइल गायब कर दी। ओएसडी आरपी पाण्डेय की जांच के बाद उसने 15 अगस्त 2012 को संजीव नागरथ और मदनपाल राणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद से ही संजीव नागरथ एक अन्य लिपिक संजीव शर्मा के साथ उसकी सीट पर आकर बैठते थे।
सरकारी काम के कारण प्रदीप को बार-बार सीट से उठकर जाना पड़ता था। उसकी गैरहाजिरी में संजीव शर्मा और संजीव नागरथ ने कई दुकानों समेत अन्य फाइलें निकाल लीं। कुछ समय बाद जब इन फाइलों की जरूरत पड़ी तो वह नहीं मिलीं।
बी-3 फाइल से मिला सुराग
प्रदीप ने बताया कि कुछ दिन पहले भूखंड संख्या बी-3 की गायब फाइल संजीव नागरथ ने डाक के माध्यम से जीडीए को उपलब्ध कराई थी। इस बारे में बात करने पर नागरथ ने कहा कि फाइल पैसे खर्च कर मिली है। क्या तुम पैसा खर्च कर सकते हो।
नागरथ ने बताया कि संजीव शर्मा गायब फाइलें दिला सकता है। इसके लिए 5 लाख रुपये खर्च होंगे। तीन दिन तक सौदेबाजी के बाद नागरथ ने तीन लाख रुपये देने के लिए कहा। मैंने यह बातें संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा को बताईं।
खुद पर आया संकट तो शुरू हुआ सिलसिला
गायब फाइलों को लेकर जीडीए वीसी ने प्रदीप के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश जारी कर दिए थे। गिरफ्तारी से परेशान प्रदीप ने संजीव नागरथ से मदद की गुहार लगाई। प्रदीप ने अधिकारियों को विश्वास में लेकर संजीव से हुई बातचीत की रिकार्डिंग कर ली।
तीन लाख रुपये के बदले संजीव नागरथ ने संजीव शर्मा की उपस्थिति में 7 जून को जीडीए के बाथरूम के पास सात फाइलें उपलब्ध करा दीं। बाकी दो फाइलें बी-1 और बी-6 पैसे मिलने के बाद देने की बात कही।
जीडीए वीसी ने कराई रेड
प्रदीप गुप्ता ने फाइलें मिलने और रिकार्डिंग की सूचना जीडीए वीसी को दी। गुम फाइलों की तलाश में जीडीए वीसी ने संजीव नागरथ और संजीव शर्मा के घर बुधवार सुबह रेड कराई।
जीडीए वीसी ने बताया कि संजीव शर्मा के घर दोनों फाइलों के अलावा भी करीब आधा दर्जन अन्य फाइलें बरामद हुईं। संजीव नागरथ के घर करोड़ों की संपत्तियों के व्यक्तिगत दस्तावेज मिले हैं। दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। नागरथ के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की भी जांच होगी।
यह फाइलें हुईं थीं गायब
दुकान संख्या बी-3, बी-4,बी-5, बी-8, बी-12, बी-13, केआई-1, केआई-7 व एल-6 समेत कुछ अन्य फाइलें
एक हजार करोड़ का है घोटाला
गायब फाइलों के मिलने से जीडीए को इंदिरापुरम में 250 वर्गमीटर के 28 भूखंड और नीतिखंड में 26 एलआईजी मकानों का पता चला है। यह संपत्ति करोड़ों की है। जीडीए अधिकारियों को उम्मीद है कि सभी फाइलें मिलने के बाद हजार करोड़ से अधिक का संपत्ति मिल सकती है। ए में करीब 11 हजार फाइलें गायब चल रही हैं।
यहां होता है खेल
जीडीए में संपत्तियों की फाइलें संबंधित जोन के बाबुओं के पास रहती हैं। चार्ज बदलने पर बाबू इन फाइलों को नवनियुक्त बाबू को सौंपते हैं। फाइलों को सौंपने के दौरान बाबू खेल कर जाते हैं। बाबू आंकड़ों में खेलकर विवादित या फर्जीवाड़े की फाइल ही गायब कर देते हैं।
पूछताछ में पता लगता है कि पूर्व में रहे बाबू ने यह गड़बड़ी की है। पूर्व में रहा बाबू किसी अन्य बाबू या अधिकारी का नाम लेता हैं। बीते दिनों जीडीए वीसी ने जब फाइलों की कस्टडी का लिखित रिकार्ड बाबुओं से मांगा था। इसके बाद से ही खुलासे हो रहे हैं।