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‘मानव वासना की सीमा नहीं, बच्ची से दुष्कर्म अत्यंत क्रूर कृत्य’

Fri, 17 Jun 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Jun 2016 12:59 AM IST
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"The limits of human lust, child rape is extremely cruel act '
बच्ची के साथ बलात्कार

मानव वासना की कोई सीमा नहीं है। दोषी ने अपनी वासना की संतुष्टि के लिए दो वर्ष की बच्ची को भी नहीं छोड़ा। यह अत्यंत क्रूर कृत्य है। हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए दोषी सुबोध को राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया।

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साथ ही निचली अदालत द्वारा उसे सुनाई 10 वर्ष कैद की सजा को उचित ठहराया है। न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता ने कहा याची के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। 
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दालत ने माना कि यह परिस्थिति जन्य साक्ष्यों पर आधारित मामला है। चश्मदीद गवाह मात्र पीड़िता बच्ची है। वह बयान देने के योग्य नहीं है। गवाह ने याची को अंतिम बार पीड़िता के साथ देखा था। उसके कब्जे से ही बच्ची को रात में बरामद किया गया। 

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ट्रायल कोर्ट का फैसला ठहराया गया सही

"The limits of human lust, child rape is extremely cruel act '
कोर्ट, अदालत - फोटो : file photo

इसके अलावा चिकित्सा जांच से भी रेप की पुष्टि हुई है। अदालत ने याची के उस तर्क को भी नहीं स्वीकारा कि उसने पीड़िता के पिता से सात हजार रुपये का ऋण लिया था और वापस न करने पर उसे फंसाया गया है।

उन्होंने कहा कि गवाहों के बयानों में किसी भी प्रकार का विरोधाभास नहीं पाया गया। उसे रेप जैसे मामले में फंसाया जाए ऐसा कोई भी आधार नजर नहीं आता।

ऐसे में ट्रायल कोर्ट का फैसला पूर्णत: ठीक है। उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। याची को किए गए अपराध में न्यूनतम 10 वर्ष कैद की सजा दी गई है। ऐसे में वे उसकी अपील खारिज करते हैं।

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