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आतंकियों ने अदालत में दी दलील- एक जुर्म के लिए दो बार नहीं चल सकता मुकदमा

Fri, 03 Jun 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Jun 2016 12:59 AM IST
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terrorists in court twice for a crime can not be prosecuted
आतंकवादी

एक जुर्म के लिए एक शख्स पर दो बार मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह दलील बृहस्पतिवार को इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दो कथित आतंकियों व यासीन भटकल के सह-आरोपियों ने विशेष अदालत में दी। 

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इन आतंकियों पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का आरोप है। इस आरोप में दिल्ली पुलिस और एनआईए ने दो अलग-अलग केस दर्ज कर रखे हैं। स्पेशल सेल ने वर्ष 2011 में यासीन भटकल, आफताब आलम व सैयद मकबूल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
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इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की गवाही चल रही है। एनआईए ने 2012 में एक नई एफआईआर दर्ज कर दी। इस मामले में आरोपों पर बहस चल रही है। टियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश पंडित के समक्ष आफताब व मकबूल के वकील ने आरोपों पर बहस करते हुए कहा कि उसके मुवक्किलों पर एक जुर्म के दो मुकदमे नहीं चल सकते। 

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आतंकियों ने कोर्ट में बहस के दौरान दी दलील

terrorists in court twice for a crime can not be prosecuted
कोर्ट, अदालत - फोटो : file photo

यह पूरी तरह गैर कानूनी है। अदालत में बहस करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि एक ही जुर्म के लिए दो एजेंसियों ने दो चार्जशीट दाखिल की है। एक चार्जशीट दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, तो दूसरी चार्जशीट राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दाखिल की थी।

एनआईए के आरोपों को खारिज करते हुए बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि एक जुर्म के लिए एक शख्स पर दो अदालतों में मुकदमा नहीं चल सकता। 

अदालत ने मामले में आरोपों पर आगे बहस सुनने के लिए छह जून की तारीख तय की है। एनआईए ने इन आरोपियों के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने व आपराधिक साजिश, अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी।

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