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'बहनें पूछ रहीं हैं कि भईया यह चाइनीज राखी तो नहीं’... आखिर क्यों

Tue, 01 Aug 2017 02:35 PM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, फरीदाबाद
यशलोक सिंह/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 01 Aug 2017 02:35 PM IST
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sisters asking brothers is it chaina made rakhi or not

भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनों द्वारा इनकी खरीद बड़ी तेजी से की जा रही है। भारी खरीददारी के माहौल में शहर के हर आम और खास बाजार में विक्रेताओं के चेहरों पर खुशी साफ पढ़ी जा सकती है।

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राखी कारोबारियों का कहना है कि इस बार के रक्षाबंधन में सबसे विशेष बात यह है कि कोई भी चाइनीज राखी नहीं खरीद रहा है। उनका कहना है कि दुकान पर आने वाली तकरीबन हर बहन यही पूछ रही है कि %भईया यह चाइनीज राखी तो नहीं’ है।
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उनके इसी रुख के कारण औद्योगिक नगरी के बाजारों से चाइनीज राखी करीब पूरी तरह से गायब हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फरीदाबाद में राखी का कारोबर 10 करोड़ रुपये से अधिक का है।
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दोकलाम विवाद के बाद फरीदाबाद के लोगों में चीन के प्रति भारी आक्रोश है। इसी का परिणाम है कि बहनें भी अपने भाई की कलाई पर चाइनीज राखी नहीं बांधेंगी। इनका कहना है कि चीन हमारे देश को धमकाए और हम वहां के बने सामान को खरीद कर उनकी अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं बना सकते।

सोशल मीडिया पर अपील का असर... 

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बड़ी संख्या में बहनें अपने भाईयों के लिए राखी तो खरीद ही रही हैं साथ ही साथ सरहद पर देश की रक्षा के लिए तैनात भईयों का भी राखियां भेज रही हैं। इसमें उनका यह प्रयास है कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार से चाइनीज राखियां नहीं भेजी जाए।

इसे सुनिश्चित करने के लिए वह बाजारों में दुकादारों से एक बार ही नहीं कई-कई बार इसकी तस्दीक कर रही हैं। शहर के एक नंबर मार्केट के राखी विक्रेता सुनील गुप्ता का कहना है कि चीनी आइटम के खिलाफ लोगों में इतना आक्रोश पहले कभी नहीं देखा गया था। जिनता कि इस बार है।

राखी खरीदने वाले बार-बार यह पूछ रहे हैं कि यह राखी चाइनीज तो नहीं है, कहां बनी रही और कहां से मंगाया है। इसकी पूरी तसल्ली के बाद ही वह खरीददारी कर रहे हैं। यहां तक की बहनें तो दुकानदारों से यह भी कह रही है कि भईया अगर यह चाइनीज निकली तो देख लेना।

चीनी आइटमों के बहिष्कार की जो अपील देशवासियों से सोशल मीडिया पर चल रही है उसका असर रक्षाबंधन पर देखने को मिल रहा है। फेसबुक, ट्वीटर व व्हाट्ऐप पर लगातार चीनी राखी नहीं खरीदने की अपील की जा रही है।

यही कारण है कि लोग राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत हो इन आइटमों का बहिष्कार कर रहे हैं। वहीं शहर में लगातार स्वदेशी अपनाओ नाम से जागरूकता रैली निकाली जा रही है इसका भी असर दिखाई दे रहा है।

क्या कहना है राखी कारोबारियों का... 

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चाइनीज राखियों के प्रति बहनों में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह राखी खरीदने से पहले इस बात की पुरी तरह से पुष्टि कर रही हैं कि यह चाइनीज तो नहीं है। अगर उन्हें जरा भी शक हो रहा है तो नहीं खरीद रही हैं। -हर्ष भाटिया, दुकानदार 

चीनी उत्पादों के प्रति इनता गुस्सा कभी नहीं देखा गया है। जितना की इस बार। बहनें ही नहीं राखी खरीदने वाले भाई भी किसी कीमत पर राखी नहीं खरीद रहे हैं। यही कारण है कि बाजार से चाइनीज राखी पूरी तरह से गायब है। हर दुकान पर अब स्वदेशी राखियां बिक रही हैं।-राजकुमार बत्रा, दुकानदार 

यह पहला मौका है जब बाजार से तकरीबन पूरी तरह से चाइनीज राखियां गायब हैं। राखी खरीददार किसी भी कीमत पर चाइनीज राखी नहीं खरीदना चाहते हैं। उनका कहना है कि स्वदेशी राखी भले ही महंगी हो खरीदी तो वही जाएंगी।-ममता रानी, राखी विक्रेता

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