{"_id":"bf481dfb01a98bdacd9125a1451687cd","slug":"number-occupied-by-booking-on-line-brokers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑनलाइन नंबर बुकिंग पर भी दलालों का कब्जा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
ऑनलाइन नंबर बुकिंग पर भी दलालों का कब्जा
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 11 Nov 2014 01:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परिवहन विभाग की वीवीआईपी वाहन नंबरों की बुकिंग साइट पर दलालों ने कब्जा जमा लिया है। साइट के खुलते ही दलाल वीवीआईपी नंबरों को ब्लाक कर देते हैं, इससे ये नंबर साइट पर दिखाई नहीं देते हैं।
कुछ दिन बाद रात में इन्हें चहेतों को आवंटित कर दिया जाता है। इसमें आरटीओ आफिस की मिलीभगत भी मानी जा रही है। पता चलने पर अफसरों ने साफ्टवेयर में बदलाव को पत्र लिखने की बात कही है।
वीवीआईपी नंबरों पर शुरू से मारामारी के बाद शासन ने इन्हें आनलाइन कर दिया था। आनलाइन होने के बाद भी नंबरों पर कुछ ही लोगों का कब्जा है। वीवीआईपी नंबर एक से 21 तक और इससे ऊपर के खास नंबर आम लोगों को नहीं मिल रहे हैं।
विज्ञापन
सीरीज के कुछ खास नंबर एक ही मोबाइल नंबर से बुक हैं। केवल गाजियाबाद ही नहीं, आसपास के जिलों के खास नंबर भी इसी मोबाइल नंबर से बुक हैं। नोएडा के वीवीआईपी नंबर तो पिछले महीने आधे से ज्यादा ब्लाक कर दिए गए थे।
ऐसे करते हैं नंबर ब्लाक-सिंडीकेट के सदस्य सीरीज शुरू होने का सही वक्त पता कर लेते हैं। ऐसे में तत्काल नंबर बुक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
इसको शुरू करके बिना भुगतान किए बीच में ही छोड़ देते हैं। इस तरह ये नंबर आनलाइन स्क्रीन पर दिखाई नहीं देते। इसको नंबर ब्लाक करना बोलते हैं। फिर चुपचाप नंबर का भुगतान कर प्रक्रिया पूरी कर देते हैं।
इस मामले वरिष्ठ एआरटीओ केपी गुप्ता ने बताया कि साफ्टवेयर में कई कमियां हैं। इनको दूर करने के लिए विभागीय विशेषज्ञों को लिखा गया है।
विज्ञापन
कुछ दिन बाद रात में इन्हें चहेतों को आवंटित कर दिया जाता है। इसमें आरटीओ आफिस की मिलीभगत भी मानी जा रही है। पता चलने पर अफसरों ने साफ्टवेयर में बदलाव को पत्र लिखने की बात कही है।
विज्ञापन
वीवीआईपी नंबरों पर शुरू से मारामारी के बाद शासन ने इन्हें आनलाइन कर दिया था। आनलाइन होने के बाद भी नंबरों पर कुछ ही लोगों का कब्जा है। वीवीआईपी नंबर एक से 21 तक और इससे ऊपर के खास नंबर आम लोगों को नहीं मिल रहे हैं।
विज्ञापन
सीरीज के कुछ खास नंबर एक ही मोबाइल नंबर से बुक हैं। केवल गाजियाबाद ही नहीं, आसपास के जिलों के खास नंबर भी इसी मोबाइल नंबर से बुक हैं। नोएडा के वीवीआईपी नंबर तो पिछले महीने आधे से ज्यादा ब्लाक कर दिए गए थे।
ऐसे करते हैं नंबर ब्लाक-सिंडीकेट के सदस्य सीरीज शुरू होने का सही वक्त पता कर लेते हैं। ऐसे में तत्काल नंबर बुक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।
इसको शुरू करके बिना भुगतान किए बीच में ही छोड़ देते हैं। इस तरह ये नंबर आनलाइन स्क्रीन पर दिखाई नहीं देते। इसको नंबर ब्लाक करना बोलते हैं। फिर चुपचाप नंबर का भुगतान कर प्रक्रिया पूरी कर देते हैं।
इस मामले वरिष्ठ एआरटीओ केपी गुप्ता ने बताया कि साफ्टवेयर में कई कमियां हैं। इनको दूर करने के लिए विभागीय विशेषज्ञों को लिखा गया है।