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जिसकी पिता ने कर दी थी तेरहवीं, 13 साल बाद पकड़ा गया वो शातिर बदमाश

Wed, 26 Oct 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Wed, 26 Oct 2016 12:03 AM IST
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notorious criminal of greater noida arrested after 13 year by up stf
- फोटो : अमर उजाला

13 साल से पुलिस को चकमा दे रहे पांच हजार के इनामी शातिर बावरिया नन्हे को एसटीएफ ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। शातिर के पिता ने गांव में उसे मृत बताकर तेरहवीं भी कर दी।

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शातिर नाम बदलकर गाजियाबाद में लोनी क्षेत्र में रह रहा था। एसटीएफ ने नन्हे को गिरफ्तार कर डकैती और हत्या की तीन वारदातों का खुलासा किया और शातिर के साथियों के संबंध में पूछताछ की है।
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स्पेशल टास्क फोर्स के पुलिस उपाधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि सूचना मिली कि शातिर अपराधी कासना कोतवाली क्षेत्र के पी-3 गोल चक्कर के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंच गई और घेराबंदी कर अपराधी को पकड़ लिया गया।
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पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम  नन्हे (50) उर्फ  राजू उर्फ  बृजकिशोर पुत्र मंगल उर्फ  भवानी सिंह बावरिया उर्फ भगत सिंह निवासी ग्राम पुवारी थाना कासना गौतमबुद्ध नगर बताया।

एसटीएफ ने आरोपी के कब्जे से देशी पिस्टल व कारतूस बरामद किये। नन्हे ने पूछताछ में बताया कि उसने पहचान छिपाने के लिए अपने व पिता के नाम बदले थे। 

पिता और भाई भी अपराधी, कई वारदात की

notorious criminal of greater noida arrested after 13 year by up stf

नन्हे कुल सात भार्ई है। अन्य भाइयों के नाम शेरू, लल्ला उर्फ जगदीश, गुलाब सिंह उर्फ पप्पू, चंदा, कालिया और नवरत्न हैं। लल्ला, गुलाब सिंह, चंदा व नवरत्न सक्रिय अपराधी रहे हैं। इन्होंने कई डकैती की वारदातों को अंजाम दिया था।

उसके भाई शेरू की करीब 20 वर्ष पहले एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।  लल्ला की करीब 15 वर्ष पूर्व नोएडा क्षेत्र में जली हुई लाश मिली थी। नन्हे का पिता मंगल सिंह पूर्व में कुख्यात हवा सिंह बावरिया गैंग का सदस्य रहा है।

नन्हे ने वर्ष 1994 में लल्ला और चंदा के साथ मिलकर अपराध जगत में प्रवेश किया और 2003 तक लल्ला, गुलाब सिंह, चंदा, कालिया,  गोपी निवासी कस्बा कासना गौतमबुद्ध नगर एवं छब्बू निवासी रामपुर कासना गौतमबुद्ध नगर के साथ मिलकर डकैती डालीं।

सबसे पहले रबूपुरा में डकैती डाली और 500 ग्राम चांदी व 20 हजार रुपये लूटे थे। इसमें नन्हे का नाम प्रकाश में नहीं आया। वर्ष 2003 में कस्बा कासना में एक दुग्ध व्यापारी के यहां नन्हे व उसके गिरोह ने डकैती डाली।

यहां गिरोह ने एक महिला की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी औैर 100 ग्राम चांदी, 50 ग्राम सोना  व 40 हजार रुपये लूट लिए गए थे। यह केस कासना कोतवाली में दर्ज है और शातिर पर पांच हजार का इनाम घोषित किया गया।

आरोपी गुलाब सिंह को पुलिस ने पकड़ लिया था और नन्हे नोएडा छोड़कर बीकानेर, राजस्थान पहुंच गया। पिता मंगल सिंह ने गांव में नन्हे की मौत की जानकारी दी औैर उसकी तेरहवीं भी कर दी।

नन्हे ने नाम बदलकर राजू रख लिया 2007 से लोनी के संगम विहार गली नंबर 13 में 250 गज के प्लाट पर मकान बनाकर रहने लगा। इस मकान की कीमत वर्तमान में 50 लाख से अधिक है।

खच्चरों को साथ लेकर करते हैं एकांत के मकानों की रेकी 

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नन्हे ने अपने साथी महेंद्र निवासी बिराडी भरतपुर, मुकेश, कुंवरपाल के साथ मिलकर भरतपुर राजस्थान में कई लूट की वारदातों को अंजाम दिया। 21 मई को एसटीएफ ने 13 वर्ष की फरारी के बाद चंदा को गिरफ्तार किया था।

सोनीपत में रहते समय नन्हे की मुलाकात विनोद बावरिया व उसके पिता बिजेन्द्र बावरिया निवासी नगला बल्लभगढ़ से हो गई।  इन्होंने चंद्रभान बावरिया के साथ मिलकर गिरोह बना लिया। 6 जून 2016 को इस गिरोह ने सोनीपत के खरखोदा स्थित दो मकानों में डकैती डाली।

पूछताछ में नन्हें ने बताया कि उन्होंने बड़ी संख्या में  खच्चर खरीदे हुए हैं। गिरोह दिन में खच्चर लेकर घूमता है। गिरोह ऐसे मकान की रेकी करता है, जिसमें रहने वाले लोग धनी है और आबादी से अलग एकांत स्थान में रह रहे हों। नन्हे का भाई चंदा ने ढाई लाख रुपये में एक ट्रक खरीदा था। जिसका इस्तेमाल डकैती के दौरान किया जाता था।
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