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अवैध रुप से बन रहे हैं अश्लील मेवाती गाने, बिना रोकथाम के चल रहा इनका व्यापार

Sat, 23 Jul 2016 01:44 AM IST
यूनुस अलवी/अमर उजाला, गुड़गांव
यूनुस अलवी/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 23 Jul 2016 01:44 AM IST
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Mevati songs are being obscene, running their illegal business
मेवाती गीत - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली जायो तबाक लेतो आयो जिठानी ढमला पे लड़ी रे, मेरा चौंतरा पे चढ़ आयो पानी चले ना जंगल कू जिठानी, मुंढेरी तेरी अजब बनी महलावती रे जैसे पुराने मेवाती कल्चर के गाने अब कहीं नजर नहीं आते बल्कि मेवात की संस्कृति को फूहड गाने बदनाम कर रहे हैं।

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आजकल मेवाती गानों में प्यार आपसी भाईचारा और मेवाती संस्कृति झलकने की बजाय इनकी जगह फूहड गानों ने ले ली है, इन गानों को परिवार के साथ सुनना तो दूर बाप बेटे भी एक साथ नहीं सुन सकते।
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केसेट और सीडी पर गानों के छपे लुटा-लुटा कर मारेंगे, असमीना की पप्पी जैसे टाइटलों से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनके अंदर कितनी फूहड़ता होगी। मेवात क्षेत्र के समाजसेवी और महिल-पुरुषों ने ऐसे अभद्र गानों पर तुरंत रोक लगाने तथा इन फूहड़ गाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। मेवात जिला में अधिकतर सड़क दुर्घटना इन्हीं गानों कि वजह से होती हैं।

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कैसेट चौराहों पर जलाकर आग के हवाले की गई

Mevati songs are being obscene, running their illegal business

करीब 20 साल पहले गांव दौहा के सरपंच स्वर्गीय फजरूदीन ने एक सामाजिक बैनर तले फूहड़ गानों के खिलाफ मुहिम चलाई थी, उस समय पुन्हाना, बडकली चौक, फिरोजपुर झिरका, नूंह और पिनगवां में हजारों ऑडियो कैसेट चौराहों पर जलाकर आग के हवाले की गई थीं।

गंदे गानों की कैसेट बनाने वालों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। लेकिन आज फिर से मेवात के लोगों को एक और फजरूदीन की जरूरत है। जो इस काम को अंजाम दे सके।

आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इन गानों की ऑडियो, वीडियो की सीडी बनाने वालों के पास सरकार से कोई मंजूरी भी नहीं है, ये लोग अवैध रूप से यह कार्य कर रहे हैं। वसीम खां मेवाती, समाजसेवी रमजान चौधरी का कहना है कि मेवात में चल रहे आजकल के फूहड गानों ने मेवात की संस्कृति को बिगाड़ कर रख दिया है।

इनकी वजह से होती हैं सड़क दुर्घटनाएं

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पहले तो ऑडियो कैसेट हुआ करती थी लेकिन अब इसकी जगह वीडियो सीडी ने ले ली है। मेवात का ऐसा कोई वाहन या डंफर होगा जिसमें ड्राइवर के सामने सीडी स्क्रीन न लगी हो, इस वजह से अक्सर सड़क दुर्घनाएं होती हैं।

समाजसेविका तमन्ना परवेज, जिला पार्षद साहिना का कहना है कि आज से जो 30-40 साल पहले जो मेवाती गानों की बात हुआ करती थी वो अब नहीं है। इसका सबसे बडा कारण मेवाती भाषा में गाने लिखने वाले कोई शायर नहीं हैं, बल्कि अनपढ़ लोग ऐसा कर रहे हैं। मेवाती गानों में बेहद अश्लीलता आ चुकी है। इन गानों पर रोक लगनी चाहिए, ताकि बच्चों पर गलत संदेश ना जाए।

70 वर्षीय रमजान नंबरदार और 75 वर्षीय इसमाइल ने बताया कि उनके जमाने में जो गाने हुआ करते थे, उनका स्थान आज के फूहड गानों ने ले लिया है।

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