बारात चढ़त के दौरान दर्दनाक हादसा, सड़क पर बाइक ठीक कर रहे मैकेनिक की ऐसे गई जान
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वेलकम इलाके में बारात की चढ़त के दौरान खुशी में फायरिंग में गोली व छर्रे लगने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य जख्मी हुए। जान गंवाने वाले भानू प्रताप सिंह (23) बाइक ठीक कर रहे थे।
घायल शरीफ (24), शाह आलम (25) व एक अन्य युवक को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बारात कर्दमपुरी इलाके से नांगलोई जा रही थी। इसी दौरान डस्टर एसयूवी से किसी अज्ञात व्यक्ति ने गोलियां चला दीं। पुलिस ने हत्या व अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर चार लोगों को हिरासत में लिया है।
पुलिस के मुताबिक, भानू प्रताप सिंह परिवार के साथ गली नंबर-3 फेज-तीन सोनिया विहार में रहते थे। परिवार में पिता धर्मपाल राठौर, मां अलका, छोटी बहन दिव्या (15), भाई अभय (7) व पत्नी पूजा हैं। पूजा गर्भवती है। धर्मपाल प्रिंटिंग प्रेस में मजदूरी करते हैं।
भानू छज्जूपुर, 100 फुटा रोड, बाबरपुर स्थित एक स्पेयर पार्ट्स की दुकान पर मैकेनिक थे। बृहस्पतिवार शाम करीब 7:00 बजे वह दुकान पर एक बाइक ठीक कर रहे थे। वहां सुंदर नगरी निवासी शाह आलम व चौहान बांगर निवासी शरीफ खड़े थे।
इसी दौरान वहां से गुजरी एक बारात में कई कारें थीं। कुछ लोग पैदल थे। इसी बारात में शामिल डस्टर एसयूवी से अज्ञात व्यक्ति ने अचानक गोलियां चला दीं। छर्रे व गोली भानू, शरीफ, शाह आलम व एक अन्य को लगे।
नजदीकी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने भानू को मृत घोषित कर दिया। गोली लगने के अलावा उसके सीने, चेहरे व अन्य जगहों पर छर्रे लगे थे। पुलिस ने रातभर छानबीन के बाद हत्या व अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने डस्टर एसयूवी कब्जे में लेकर चार लोगों को हिरासत में लिया है।
भानू के घर में मातम
भानू की मौत के बाद उसके घर में मातम है। उसकी मां अलका और पत्नी पूजा तो रोते-रोते बार-बार बेहोश हो जाती हैं। पिता धर्मपाल रोते हुए कहते हैं कि होनी को कौन टाल सकता है। शायद हमारे नसीब में यह दिन देखना लिखा था...।
करीब एक साल पूर्व ही भानू की शादी हुई थी। धर्मपाल प्रिंटिंग प्रेस में मजूदरी करते हैं, लेकिन उससे घर खर्च नहीं चल पाता था। भानू के छोटे भाई-बहन अभी पढ़ाई कर रहे हैं।
भानू के रिश्ते के जीजा संजय का कहना है कि किसी की दो पल की खुशी के चक्कर में उनके घर में अंधेरा हो गया। परिवार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
शाम को कराया पोस्टमार्टम
परिजन भानू का शव लेने के लिए सुबह करीब 8:00 बजे जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी पहुंच गए। दिनभर के इंतजार के बाद शाम करीब 6:00 बजे भानू का शव परिवार को सौंपा जा सका। भानू के रिश्तेदार निखिल का कहना था कि दिनभर पुलिस अधिकारी बस थोड़ी-थोड़ी देर करते रहे। पुलिस ने पोस्टमार्टम देर से कराया और उन्हें मोर्चरी पर ही अंधेरा हो गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस अधिकारी शाम तक कागज पूरे करने में लगे रहे।
दिल्ली पुलिस के दावे खोखले
देहात इलाके की बात तो दूर, राजधानी दिल्ली के शहरी इलाके में भी बड़े पैमाने पर हर्ष फायरिंग होती है। दूल्हे के रिश्तेदार या दोस्त खुशी में अक्सर आपा खो बैठते हैं और लाइसेंसी या अवैध हथियारों से गोलियां चलाने लगते हैं। भानू के साथ भी ऐसा ही हुआ। पुलिस ऐसे लोगों से सख्ती से निपटने के लगातार दावे करती है, लेकिन लोग हर्ष फायरिंग से बाज नहीं आते।