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हीरोइन बनाने का झांसा देकर लड़कियों की तस्करी

Wed, 15 Jul 2015 08:15 AM IST
अमर उजाला, लोनी
अमर उजाला, लोनी Updated Wed, 15 Jul 2015 08:15 AM IST
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Make heroine trafficking of girls by swindle

लोनी कोतवाली पुलिस की ऑपरेशन स्माइल टीम ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के एक ऐसे गैंग को पकड़ा है, जो 50 हजार रुपये में नाबालिग लड़कियों को फिल्मों में हीरोइन बनाने का झांसा देकर देह व्यापार में धकेलता था।

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शादी और घरेलू काम के लिए बेचता था। गैंग के तीन तस्करों को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। गैंग में शामिल एक महिला फरार है। इनके चंगुल से चार लड़कियों को छुड़ाया।
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तस्कर लड़कियों को दिल्ली रेलवे स्टेशन से काम दिलाने का झांसा देकर लाए थे। इनमें से 17 साल की किशोरी लोनी की है, जिसने बेचे जाने की भनक लगने पर अपने घर फोन कर दिया था। इसके बाद पुलिस तस्करों तक पहुंची। पुलिस का दावा है कि ये गिरोह अब तक 40 से ज्यादा लड़कियां बेच चुका है।
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सीओ द्वितीय कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने सीतापुरी पार्ट-1 स्थित एक मकान से राजू चौधरी, अजय कुमार, राजन को गिरफ्तार किया है। अजय कुमार, राजन कुमार दरभंगा और राजू चौधरी मुजफ्फरपुर बिहार का रहने वाला है। तीनों दिल्ली में रहते हैं।

मकान की तलाशी में 14, 15, 17 वर्षीय किशोरी और 20 वर्षीय युवती मिली। इनमें से लोनी निवासी किशोरी के अलावा बाकी दो किशोरी और एक युवती झारखंड की रहने वाली हैं। इनमें बेचकर देह व्यापार में धकेलने की फिराक में थे।

तस्कर डांस पार्टी, क्षेत्रीय सीडी फिल्मों में हीरोइन, घरों में काम आदि दिलाने का लालच दिया जाता था। जिसके बाद देह व्यापार में धकेल दिया जाता था। सीओ ने बताया कि इस गैंग के निशाने पर घर से भागी लड़कियां होती थीं, जिन्हें ये सब्जबाग दिखाकर रेलवे स्टेशन से अपने चंगुल में फंसा लेते थे।

ज्यादतर इनके चंगुल में बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी की लड़कियां आती थीं। लड़कियों को मुंबई, दिल्ली और मेट्रो सिटी में बेचा जाता था। गैंग में एक महिला भी थी, जो भागी हुई है। गैंग के अन्य सदस्यों और इनके नेटवर्क के बारे में छानबीन की जा रही है।

‘मर्दानी’ फिल्म स्टाइल में हुआ खुलासा
ह्यूमन ट्रैफिकिंग के इस मामले का खुलासा बॉलीवुड फिल्म ‘मर्दानी’ के स्टाइल में हुआ। लोनी एसएचओ ने बताया कि एक किशोरी पिता की डांट से नाराज होकर सात जुलाई को घर से भाग गई थी।

पिता ने लोनी पुलिस को इसकी शिकायत दी थी और ऑपरेशन स्माइल के तहत इनकी खोजबीन शुरू की गई। सोमवार की देर शाम किशोरी के पिता ने पुलिस को सूचना दी कि बेटी का फोन आया था और कुछ लोग उसे बेचने वाले हैं।

जिस नंबर से किशोरी ने पिता को फोन किया था, पुलिस ने उस नंबर को ट्रेस किया। यह फोन नंबर पकड़े गए एक बदमाश का ही था, जिससे किशोरी ने मौका देखकर परिवार को कॉल किया था। इसके बाद दिल्ली स्थित सीतापुरी पार्ट-1 स्थित एक मकान में मंगलवार सुबह दबिश दी गई।  

ऐसे फंसाते थे जाल में
सीओ द्वितीय ने बताया कि गिरोह के सदस्य दिल्ली, गाजियाबाद, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के रेलवे स्टेशनों के पास मौजूद रहते हैं। स्टेशन पर ये लोग उन किशोरियों को ट्रेस करते हैं, जो कि प्रेम प्रसंग, नौकरी या फिर परिजनों से क्षुब्ध होकर घर से भागी हुई होती हैं।

इन लड़कियों को नौकरी दिलाने, फिल्मों में काम दिलवाने, हिरोइन बनाने का झांसा देकर गिरोह के सदस्य दिल्ली ले आते हैं। दिल्ली में एक युवक को ये लड़कियां सौंपी जाती थी, वह युवक किशोरियों को अपने साथ कुछ दिन रखता।


सहानुभूति दिखाकर उन्हें अपने विश्वास में लेता था और इसके बाद दंपति के पास काम दिलवाने के बहाने ले जाता था, जो कि किशोरियों का सौदा करते थे।

मिनी स्कर्ट नहीं पहना तो लड़की को पीटा
पुलिस ने बताया कि झारखंड की रहने वाली 20 वर्षीय युवती ने बदमाशों के कहने पर मिनी स्कर्ट पहनने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद बदमाशों ने उसके साथ मारपीट भी की थी।

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