दो दिन तक नशे में रहने के बाद नौकरानी ने बनाया एक खतरनाक प्लान, फिर...
- दो दिनों तक हल्के नशे में रही थी नौकरानी मंजू
डायरेक्टर के परिवार को नशीला पदार्थ देने से पहले नौकरानी ने खुद पर किया था टेस्ट
- दो दिनों तक हल्के नशे में रही थी नौकरानी मंजू
- योजना के तहत तीन दिन पहले ही काम पर लगी थी
- वारदात को अंजाम देने के तीन-चार दिन बाद ही यहां भागने की थी योजना
- इस योजना को अंजाम देने के लिए सुनील ने मंजू के सहारे बुना था पूरा जाल
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विस्तार
पॉश एरिया डीएलएफ फेज-2 की एम-3 ब्लाक में स्थित कोठी में डकैती की योजना को अंजाम देने के लिए पूरा प्लान तैयार किया गया था। योजना के तहत ही ओडिशा की मंजू तीन पहले ही एमएनसी डायरेक्टर के घर पर काम मांगने आई थी।
जरूरत के हिसाब से उसे यहां काम मिल भी गया था। यहां तक उसे पहुंचाने में आरोपी सुनील ने उसकी मदद की थी। आरोपी मंजू व माधुरी ओडिशा की रहने वाली हैं। यह काम की तलाश में गुरुग्राम आई थी, निजकी मुलाकात आरोपी सुनील से हुई थी।
सुनील कोलकाता में डकैती के मामले में मोस्टवांटेड है। सुनील की तलाश में कोलकाता पुलिस उसे पकडने के एक सप्ताह पहले यहां आई थी, लेकिन वह हाथ नहीं लग सका था।
तीन दिन पहले मिला काम और शुरु हो गई डकैती की प्लानिंग
एमएनसी का डायरेक्टर अपने माता-पिता व बच्चों के साथ यहां एम-3/57 में रह रहा है। उसके घर तीन पहले ही मंजू को नौकरानी का काम मिला था। इसी के साथ ही डकैती की योजना पर काम शुरू हो गया था।
मंजू डायरेक्टर के परिवार को खाने में नशीला पदार्थ खिलाकर अपने साथियों के साथ आराम से डकैती डालने की फिराक में थी। वह कहीं से कुछ नशीली गोलियां भी लेकर आई थी।
पहले ही दिन उसने इन गोलियों को पीसकर उसमें से थोड़ी सी दवा खुद ले ली थी, जिसका उस पर काफी अच्छा असर भी हुआ। दो दिन वह खुद नशे की हालत में रही थी।
दवा का रिजल्ट बेहतर आने पर बाकी साथियों को बुलाना था
दवा का रिजल्ट बेहतर आने के बाद रविवार को योजनानुसार, बाकी साथियों को मिलने के लिए एम-2 ब्लाक में स्थित कोठड़े में बुलाया गया था और यहां योजना के अनुसार किसे क्या करना है, यह सब समझाया गया था।
पुलिस आरोपियों को पकडने के बाद जब एम-3 ब्लाक में डायरेक्टर की कोठी पर पहुंची तो वहां कुछ लोग दवा का नशा होने के कारण गहरी नींद में सोये हुए मिले तथा उनमे से परिवार के एक बुजुर्ग की हालत कुछ खराब मिली। जिसे पुलिस ने ही अस्पताल पहुंचाया। जो अब ठीक है।
पुलिस ने उस दाल को भी कब्जे में लिया है, जिसमें मिलाकर यहड नशीली दवा परिवार के सदस्यों को खिलाई गई थी। योजना के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के 3-4 दिन बाद ही इन सबको यह शहर छोड़कर यहां से यहां से निकल जाना था। लेकिन पुलिस की तत्परता ने इन्हे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
इस तरह से देना था वारदात को अंजाम...
सभी घर वालों के सोते ही मंजू अंदर कोठी से अपने साथियों को फोन करेगी। फोन आते ही उसके साथियों को कोठी मे डाका डालना था। कोठी में जाने के लिए मंजू उर्फ पूनम अंदर से दरवाजा खोल देगी।
सुनीले व सतनारायण के पास एक-एक देशी कट्टा रहेगा और व ग्रुप के साथियों में सबसे आगे रहेंगे। उसके बाद उस घर का कोई भी सदस्य जागा मिला वह दोनों उसको हथियार के बल पर डराकर काबू करेंगे।
मोहम्मद जाहिर, माधुरी के साथ अन्य पर नजर रखेगा व जागने पर अपने चाकू से डराएगा। माधुरी रस्सी से उसके हाथ बांधेगी। रामकुमार, ऋतिक व अरविंद अपनी-अपनी रॉड से चाबी न मिलने पर जेवरात व नकदी पर डाका डालने के लिए लोहे अलमारी को तोड़ेंगे।
ये है पूरा मामला
गुरुग्राम के पॉश एरिया में स्थित कोठी में डकैती डालने की नीयत से एक घरेलू नौकरानी ने घर के सभी सदस्यों को दाल में नशीली गोलियां मिलाकर खिला दीं लेकिन पुलिस को घटना से पहले ही भनक लग गई और दो महिलाओं समेत आठ लोगों को पकड़ लिया।
इनमें से दो पर पहले भी दिल्ली और कोलकाता में चोरी-डकैती के मामले दर्ज हैं। अब पुलिस पूछताछ के लिए सभी को रिमांड पर लेगी। मामला डीएलएफ फेज-2 में एक एमएनसी के निदेशक की कोठी का है।
डीसीपी क्राइम सुमित कुमार ने बताया कि रविवार रात क्राइम यूनिट सेक्टर-17 के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र चौहान को डीएलएफ फेज-2 के एम-2 ब्लाक के पास में बोरिंग के कोठडे़ में से छह युवक व एक युवती के छुपे होने की सूचना मिली। उन्होंने टीम तैयार कर मौके को घेर लिया।
घर की नौकरानी थी सरगना, दो महिलाओं समेत आठ गिरफ्तार
पुलिस ने मौके से बिहार के जिला मधुबनी के गांव परसाही निवासी सुनील (27), गांव चतरू मंडल भुजियासी निवासी सत्यनारायण (28), गांव घोट प्रसाही निवासी रामकुमार ठाकुर (24), गांव भौभोरा निवासी रामक्लेश उर्फ ऋतिक राम (19), गांव बथलाह निवासी अरविंद (27), गांव घुसई निवासी मोहम्मद जाहिर (27), ओडिशा के जिला पूर्व मेहंदीपुर के गांव थलामी निवासी माधुरी (20) व ओडिशा निवासी मंजू उर्फ पूनम को गिरफ्तार किया गया है।
छह आरोपी कक्षा 5 से 10वीं तक ही पढ़े हैं, जबकि गैंग का मुखिया सत्यनारायण व अरविंद्र अनपढ़ हैं। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने दो देशी कट्टे, दो कारतूस, एक लोहे की रॉड, एक स्टील की रॉड, एक सरिया, एक चाकू और एक रस्सी बरामद की है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में थाना डीएलएफ में केस दर्ज किया गया है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि डीएलएफ फेस-2 में कोठी नंबर एम-3/57 एक एमएनसी के निदेशक की है। इसमें आरोपी मंजू उर्फ पूनम घरेलू नौकर का कार्य करती थी। जो कि गैंग के मुखिया सत्यनारायण की जानकार है।
एम-3 ब्लॉक की कोठी में डकैती डालने की थी योजना
मंजू की मदद से आरोपियों की इस कोठी में डकैती डालने की योजना थी। जहां पर मंजू ने योजना के अनुसार मकान में रहने वाले सभी सदस्यों को दाल में मिलाकर नींद की गोली खिला दी थी, लेकिन वारदात को अंजाम देने से पहले ही पुलिस को इसकी भनक लग गई और इन्हें दबोच लिया गया।
पूछताछ में पता चला है कि आरोपी सत्यनारायण पहले भी थाना सेक्टर-29 में दर्ज चोरी व धोखाधड़ी की घटना में शामिल रह चुका है। इसके अलावा दिल्ली के मॉडल टाउन थाने में भी उस पर चोरी के 8-10 मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2017 में तिहाड़ जेल से छूटकर बाहर आया है। गहनता से पूछताछ जारी है।