फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   land scam of 3200 crore rupees in greater noida

3200 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला, चेयरमैन ने 30 मई तक मांगी जांच रिपोर्ट

Sat, 13 May 2017 09:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 13 May 2017 09:49 AM IST
विज्ञापन
  land scam of 3200 crore rupees in greater noida
DEMO PIC

यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन ने मास्टर प्लान से बाहर 3200 करोड़ रुपये की जमीन खरीद घोटाले की जांच 30 मई तक पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है। चेयरमैन ने ऐसे मामलों की सीबीआई जांच कराए जाने की हिमाकत की है। 

विज्ञापन


दरअसल, सपा सरकार में 2012 से 2015 के बीच यमुना प्राधिकरण में करीब 3200 करोड़ रुपये की जमीन किसानों से बैनामे के आधार (सहमति से) पर खरीदी गई। यह जमीन यमुना प्राधिकरण के मास्टर प्लान 2021 से बाहर है। इस जमीन को तीन से चार साल पहले खरीदने की कोई जरूरत नहीं थी। इससे प्राधिकरण पर भारी-भरकम कर्ज पर लद गया। सूत्र बताते हैं कि करीब सात गांव हैं, जो कि जेवर एयरपोर्ट के आसपास बसे हुए हैं। 
विज्ञापन


इस जमीन का कोई उपयोग न तो अब तक हो सका है और न ही हाल-फिलहाल में होने की संभावना है। बताया जाता है कि कुछ नौकरशाहों और नेताओं ने प्राधिकरण के अफसरों से साठगांठ कर किसानों  से मास्टर प्लान के बाहर की जमीन सस्ते दर पर खरीद ली। उसके बाद प्राधिकरण ने उसे खरीदा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बीच नौकरशाहों और नेताओं ने मोटा मुनाफा काटा। ब्लैक मनी से किसानों से जमीन खरीदी और प्राधिकरण से मिलने वाले मुआवजे से उसे व्हाइट मनी में तब्दील कर लिया। मुआवजे के साथ ही प्राधिकरण ने 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा भी दे दिया, जबकि उन तमाम किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका, जिनकी जमीन खुद प्राधिकरण ने अधिग्रहित की है। वे प्राधिकरण का चक्कर काटते रह गए। 

शुक्रवार को प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार की संज्ञान में यह मामला आया तो पहले तो वे चौंक पड़े। इतनी जमीन बिना प्लान के कैसे खरीद ली गई। उन्होंने अपने अधीनस्थों से जानकारी ली। सीईओ ने उनको बताया कि मास्टर प्लान से बाहर की जमीन खरीद मामले की जांच एसीईओ को सौंप दी गई है। 

इस पर चेयरमैन ने 30 मई तक हर हाल में इसकी रिपोर्ट देने को कहा। इस रिपोर्ट को शासन को भेजने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले की जांच तो सीबीआई से करानी चाहिए। चेयरमैन ने जरूरत पडने पर सीबीआई जांच के लिए भी शासन से सिफारिश करने की बात कही। 

जेपी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने जेपी कंपनी से अतिरिक्त मुआवजा लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट से पंचाट के आदेश को चुनौती देते हुए बीते 9 मई को याचिका दायर की गई है। सुनवाई की तिथि तय नहीं है। 
दरअसल, यमुना प्राधिकरण जेपी कंपनी से बसपा सरकार में यमुना एक्सप्रेसवे बनाने के एवज में दी गई जमीन पर किसानों को अतिरिक्त मुआवजे की रकम मांग कर रहा है। जेपी ने देने से इंकार कर दिया। इसके बाद प्राधिकरण ने नोटिस जारी की, जिस पर जेपी ने हाईकोर्ट की शरण ली। 


उसका कहना है कि एक्सप्रेसवे बनाने के एवज में जमीन मिली है। इस पर अतिरिक्त मुआवजा नहीं बनता। हाईकोर्ट ने मामले के लिए पंचाट का गठन करने का आदेश दे दिया। प्राधिकरण ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बता दें कि जेपी कंपनी पर करीब 1200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा बकाया है। उसे करीब ढाई हजार हेक्टेयर जमीन एक्सप्रेसवे बनाने के एवज में दी गई है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed