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90 रुपए की लूट में 13 साल बाद मिला न्याय
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 20 Jan 2014 01:11 PM IST
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करीब 13 साल के बाद 90 रुपये लूटने के आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट ने दलील दी कि मामले में गलत पहचान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस मामले में आरोपी को निचली अदालत ने सात साल की सजा सुनाई थी।
पेश मामले के अनुसार खालिद कुरैशी ने 1 अप्रैल 2001 को निचली अदालत के एक फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। निचली अदालत ने 90 रुपये लूटने के मामले में 7 साल की सजा और 10 रुपये का जुर्माना लगाया था।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एसपी गर्ग ने सभी की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी खालिद कुरैशी ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने हवाला दिया कि खालिद कुरैशी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था। बल्कि वह घटना के 1-2 घंटे बाद गिरफ्तार किया गया। इसलिए गलत पहचान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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कुरैशी के खिलाफ आरोप है कि उसने 30 जनवरी 1999 को जीतू चौधरी के साथ मिलकर पूरन सिंह और जगन्नाथ दास से 50 और 40 रुपये लूट लिए थे। जीतू को निचली अदालत ने बरी कर दिया।
शिकायतकर्ता पूरन सिंह ने बताया कि वह जगन्नाथ दास के साथ बाजार से वापस आ रहे थे। उसी दौरान दो लोग उन्हें लूट कर फरार हो गए। दोनों पीड़ितों ने वहां काम कर रहे सुरक्षा गार्ड से पूछा। उसके आधार पर पहले उन्होंने जीतू फिर उसकी निशानदेही पर खालिद कुरैशी को पकड़ लिया।
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पेश मामले के अनुसार खालिद कुरैशी ने 1 अप्रैल 2001 को निचली अदालत के एक फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। निचली अदालत ने 90 रुपये लूटने के मामले में 7 साल की सजा और 10 रुपये का जुर्माना लगाया था।
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मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एसपी गर्ग ने सभी की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी खालिद कुरैशी ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने हवाला दिया कि खालिद कुरैशी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था। बल्कि वह घटना के 1-2 घंटे बाद गिरफ्तार किया गया। इसलिए गलत पहचान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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कुरैशी के खिलाफ आरोप है कि उसने 30 जनवरी 1999 को जीतू चौधरी के साथ मिलकर पूरन सिंह और जगन्नाथ दास से 50 और 40 रुपये लूट लिए थे। जीतू को निचली अदालत ने बरी कर दिया।
शिकायतकर्ता पूरन सिंह ने बताया कि वह जगन्नाथ दास के साथ बाजार से वापस आ रहे थे। उसी दौरान दो लोग उन्हें लूट कर फरार हो गए। दोनों पीड़ितों ने वहां काम कर रहे सुरक्षा गार्ड से पूछा। उसके आधार पर पहले उन्होंने जीतू फिर उसकी निशानदेही पर खालिद कुरैशी को पकड़ लिया।