जिगिषा घोष मर्डर : 'अपराध को अमानवीय व क्रूर तरीके से दिया गया अंजाम'
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आईटी कंपनी में मैनेजर जिगिषा घोष के हत्यारों में से दो को अदालत ने सजा ए मौत और तीसरे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सात साल पुराने इस मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि दोषियों ने बेहद निर्मम व अमानवीय तरीके से वारदात को अंजाम दिया और उनके सुधरने की संभावना बेहद कम है।
ऐसे अपराधियों से नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जायेगा। साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने मामले में दोषी मदनगीर निवासी रवि कपूर व लाडो सराय निवासी अमित शुक्ला को फांसी व तीसरे दोषी गांव मसूदपुर निवासी बलजीत मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अमित शुक्ला मूल रूप से यूपी के फरुर्खाबाद का रहने वाला है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा इस मामले में अपराध को बेहद सोचे समझे अमानवीय व क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया। इन दोषियों ने निर्दोष, असहाय युवती को कई घंटे तक बंधक बनाकर रखा। उसने इन हत्यारों से दया की भीख मांगी, लेकिन इन्होंने उसकी हत्या कर दी।
कोर्ट ने दोषियों पर कुल 9.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस राशि में से छह लाख रुपये मृतका के माता पिता को मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया है। अदालत ने दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण को भी मृतका के माता पिता को उचित मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान मौजूद रहे जिगिषा के माता-पिता
फैसले पर जिगिषा के माता पिता ने संतोष जाहिर किया है तो बचाव पक्ष ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। मामले की सुनवाई के दौरान जिगिषा के माता पिता व संयुक्त आयुक्त एचजीएस धालीवाल मौजूद थे।
इस दौरान अदालत में पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के माता पिता भी मौजूद थे। रवि कपूर व अमित शुक्ला पत्रकार सौम्या विश्वनाथन व उसके बाद टैक्सी चालक नदीम की हत्या में भी शामिल रहे हैं।
यह दोनों मामले जिगिषा की हत्या के मामले में पूछताछ के दौरान खुले थे। नदीम के मामले में गवाही पूरी हो चुकी है और जल्द उसका फैसला आ सकता है। अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए कहा था कि दोषियों ने केवल मौज मस्ती के लिये 28 साल की युवती की हत्या कर दी।
अदालत ने तीन आरोपियों को 14 जुलाई को हत्या, अपहरण, लूट, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य नष्ट करने व आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में दोषी करार दिया था।
जानिए क्या है पूरा मामला और मर्डर केस क्रोनोलॉजी
क्या है मामला
एचपी कंप्यूटर में ऑपरेशन मैनेजर जिगिषा घोष की मार्च 2009 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि रवि कपूर व अन्य दोषियों ने युवती को उसके घर के नजदीक से 18 मार्च 2009 को अगवा कर लिया।
इसके बाद वह उसे लेकर महीपालपुर स्थित एटीएम गए और वहां कैश निकलवाया। दोषियों ने उसका सामान लूट लिया और हत्या के बाद उसके शव को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड के जंगलों में फेंक दिया।
हत्या के दो दिन बाद हरियाणा पुलिस ने उसका शव बरामद किया था और इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दी थी। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में अपराधियों के हाथ में एक खास टैटू दिखाई दिया था। पुलिस ने इस पर भी काम किया था। जब यह दोषी पकड़े गये तो यह टैटू बलजीत मलिक के हाथ पर मिला था।
समाज के लिए खतरा हैं दोनों
अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने से पहले सरकार को एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। इस अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रवि कपूर व अमित शुक्ला के सुधरने की संभावना बेहद कम है और वह समाज के लिए खतरा हैं। बलजीत मलिक के बारे में सुधरने की संभावना व उसे एक मौका देने की बात कही गई थी।
जिगिषा घोष मर्डर केस क्रोनोलॉजी
22 अगस्त 2016: कोर्ट ने रवि कपूर व अमित शुक्ला को फांसी व बलजीत मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई।
20 अगस्त 2016: दोषियों की सजा पर बहस, अभियोजन ने दोषियों के लिये मांगी फांसी, बचाव पक्ष ने किया नरमी बरतने का आग्रह, सजा पर फैसला सुरक्षित
14 जुलाई 2016: कोर्ट ने तीन आरोपियों को हत्या, अपहरण, लूटपाट समेत कई धाराओं में ठहराया दोषी।
5 जुलाई 2016 : कोर्ट ने अंतिम जिरह सुनने के बाद फैसला रखा सुरक्षित।
15 अप्रैल 2010 : मुकदमे की सुनवाई हुई शुरू, जिगिषा के पिता बने अभियोजन के पहले गवाह।
5 दिसंबर 2009: कोर्ट ने तीन आरोपियों के खिलाफ तय किए आरोप।
30 अगस्त 2009: कोर्ट ने आरोपों पर बहस सुनने के लिए 28 अगस्त की तारीख की तय।
जून 2009: पुलिस ने जांच के बाद जिगिषा घोष मामले में चार्जशीट की दाखिल।
25 मार्च: पुलिस ने दोषियों को किया गिरफ्तार, पत्रकार सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस भी सुलझाया, उसे 30 सितंबर 2008 की रात कार से घर लौटते समय दोषियों ने मार दी थी गोली।
19 मार्च: सूरजकुंड इलाके में मिला जिगिषा का शव।
18 मार्च 2009: जिगिषा घोष को कैब ने सुबह चार बजे घर के नजदीक छोड़ा, दोषियों ने किया अगवा।