अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना शॉर्प शूटर, जानिए क्यों
रग्बी खिलाड़ी बना शार्पशूटर, गिरफ्तार
- सोनू दरियापुर गिरोह में था शामिल, दिल्ली पुलिस ने रखा था एक लाख रुपये का इनाम
- मियांवली तिहरे हत्याकांड में था आरोपी, नौ एमएम की पिस्टल हुई बरामद
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को मियांवली तिहरे हत्याकांड में एक और सफलता मिली है। स्पेशल सेल ने सत्यवान उर्फ सोनू दरियापुर गिरोह के एक और शार्पशूटर परमीत डबास उर्फ भांजा को गिरफ्तार किया है।
आरोपी अंतर्राष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी रह चुका है और भारतीय टीम की ओर से खेलने के लिए कई देशों में जा चुका था। दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम रखा हुआ था। उसके पास से 9 एमएम की पिस्टल व दो कारतूस बरामद हुए हैं।
स्पेशल सेल डीसीपी प्रमोद कुशवाहा के अनुसार मियांवली में 30 अप्रैल, 2017 को तिहरा हत्याकांड हुआ था। इसमें गैंगस्टर भूपेंद्र उर्फ मोनू उर्फ टेंपो, उसके दोस्त अर्जुन व पीएसओ और दिल्ली पुलिस के एएसआई विजय कुमार की हत्या कर दी गई थी।
दूसरा पीएसओ सिपाही कुलदीप शर्मा घायल हो गया था। तिहरा हत्याकांड सोनू दरियापुर और भूपेंद्र उर्फ मोनू गिरोह के बीच चल रही गैंगवार का नतीजा था। स्पेशल सेल ने हत्याकांड को अंजाम देने वाले सोनू दरियापुर गिरोह के सतीश, नवीन खत्री, राजेश उर्फ राजे, सोनू उर्फ केजरीवाल, सुमित उर्फ पालोत्रा और संदीप को गिरफ्तार कर चुकी है।
जबकि सोनू दरियापुर, विजय लांबा और परमीत डबास फरार थे। स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर उमेश बड़थ्वाल की टीम को 2 अगस्त को सूचना मिली थी कि परमीत डबास, मेन गेट, संजय वन, अरुणा आसिफ अली रोड पर आएगा। टीम ने यहां घेराबंदी कर आरोपी शार्प शूटर को पकड़ लिया।
मैच खेलने दो बार पाकिस्तान भी जा चुका है
स्पेशल सेल अधिकारियों के अनुसार आरोपी परमीत डबास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रग्बी खेल चुका है। इसमें वर्ष 2005 में पाकिस्तान, 2006 में श्रीलंका और 2015 में उजबेकिस्तान में रग्बी में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। पुलिस के अनुसार कुछ दोस्तों की संगत में आकर वर्ष 2007 में अपराध की दुनिया में उतर गया था।
लोन चुकाने के लिए तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था
परमीत डबास अप्रैल, 2016 में पेनक्रेयाटिक सर्जरी के लिए शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती हुआ था। इलाज के लिए इसने काफी बड़ा लोन लिया था, जिसको ये चुका नहीं पाया था। सोनू इसका दूर का रिश्तेदार था और ये उसे मामा कहकर बुलाता था।
इसने जब सोनू को अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में बताया तो उसने इसे मोनू की हत्या की साजिश में शामिल होने के लिए कहा था। सोनू के कहने पर फर्जी आईडी से छह सिमकार्ड लिए थे। परमीत ने गिरोह के सदस्यों के लिए अपनी आईडी पर निहाल विहार में किराये पर कमरा लिया था। तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद हिमाचल प्रदेश, देहरादून, हरियाणा, कोलकाता भाग गए थे।