यहां बिकती है एमबीबीएस, बीटेक और पीएचडी की डिग्री, कीमत केवल 60 हजार रूपए
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पुलिस की मानें तो आरोपी गैंग एमबीबीएस, बीटेक और पीएचडी की डिग्री के लिए साठ हजार से पांच लाख रुपये तक वसूल लेते थे। आरोपियों के पास से 200 फर्जी मार्कशीट, पांच मोबाइल, एक लैपटॉप, एक स्कैनर और प्रिंटर के अलावा छह अन्य सर्टिफिकेट बरामद हुए हैं। शुरूआती जांच के बाद पुलिस को पता चला है कि गोरखधंधे के कारोबार के तार भिवानी से जुड़े हैं। तिलक नगर थाना पुलिस को गैंग के कुछ अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त विजय कुमार ने बताया कि 23 जनवरी को तिलक नगर निवासी शाहबाजुल हक नामक युवक ने नकली मार्कशीट व सर्टिफिकेट के नाम पर ठगी की शिकायत तिलक मार्ग थाने में की थी। पीड़ित ने बताया कि वह 10वीं कक्षा में दाखिले के लिए रूपेश कुमार नामक शख्स के पास गया था।
व्हाट्सऐप या ई-मेल के जरिये भेज दी जाती थी फोटो
शाहबाजुल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। तिलक नगर थाना प्रभारी शिव कुमार, एसीपी आलाप पटेल, तिलक विहार चौकी इंचार्ज राजपाल सिंह व अन्य की टीम ने जांच के बाद रूपेश को सात फरवरी को दबोच लिया।
पूछताछ के दौरान रूपेश ने बताया कि उसे डिग्री, रितेश नामक युवक उपलब्ध कराता है। इनके गैंग में सोमीर, राजेश गुप्ता, मुकेश ठाकुर व अन्य हैं। रूपेश से पूछताछ के बाद पुलिस ने रितेश, सोमीर व मुकेश ठाकुर को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सोमीर भिवानी में अपने नेटवर्क से डिमांड के अनुसार डिग्री व मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट का आर्डर देता था।
कागजात की फोटो व्हाट्सऐप या ई-मेल के जरिये भेज दी जाती थी। बाद में हार्ड कॉपी कोरियर के जरिये सोमीर तक आ जाती थी, जिसके बाद यह आगे दे देता था। पुलिस को मामले में राजेश गुप्ता व भिवानी वाले नटवर्क के कई लोगों की तलाश है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
ऐसे फंसाया जाता था शिकार...
रूपेश, मुकेश, रितेश व अन्य लोगों ने कंसलटेंसी एजेंसी खोली हुई थी। इसकी आड़ में यह लोग 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन कराने का झांसा देते थे। जो लोग उनके पास दाखिले के लिए आते थे तो वह उनको डिग्री और मार्कशीट देकर फंसा लेते थे। व्हाट्सऐप व ई-मेल के जरिये आगे आरोपी डिग्री व मार्कशीट की डिमांड भेज देते थे। कागजात तैयार होने के बाद उसकी फोटो व्हाट्सऐप पर आ जाती थी। जिसे आरोपी पीड़ितों को दिखाते थे। बाद में आरोपी पीड़ितों को नकली मार्कशीट और डिग्री थमा देते थे। ज्यादातर मामलों में प्राइवेट नौकरी करने के कारण लोग इन मार्कशीट व डिग्री की जांच नहीं करवाते थे। इसलिए इनके फर्जीवाड़ा का खुलासा नहीं हो पाता था।
दो हजार से अधिक बना चुके हैं फर्जी डिग्री व सर्टिफिकेट
पुलिस की मानें तो आरोपी पिछले छह सात सालों से फर्जी डिग्री और मार्कशीट का धंधा कर रहे हैं। इस अवधि में यह लोग दो हजार से ज्यादा लोगों को कागजात बनवाकर दे चुके हैं। जैसा ग्राहक इनके पास फंसता था, उसी के अनुसार यह लोग पैसे लेते थे। एमबीबीएस, बीटेक, बीएड और पीएचडी की डिग्री के लिए यह लोग 50 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक वसूल लेते थे। शुरूआती जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपियों का जाल दिल्ली के अलावा, हरियाणा मध्य प्रदेश, बिहार व राजस्थान में फैला हुआ है। यह लोग वहां तक लोगों को कागजात बनवाकर देते थे।
फर्जी वेबसाइट पर भी डाला हुआ है इनका डाटा
पुलिस अधिकारी के मुताबिक आरोपियों ने अपना काम पक्का करने के लिए एक फर्जी वेबसाइट बनाई हुई थी। वेब साइट का नाम इंडिया आईसीएसई डॉट इन था। इन लोगों ने इस वेबसाइट पर फर्जी कागजातों की जानकारियां डाली हुई थी। कोई जब इन लोगों से नकली कागजात होने की शंका जताता था तो यह वेब साइट का पता देकर उसपर जांच करने के लिए कहते थे। जांच करने पर पीड़ित को उसकी जानकारी वहां मिल जाती थी। ऐसे में इनके पकड़े जाने की संभावना कम हो जाती थी। पुलिस इनसे पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।