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पूर्व सीएमएस के बेटे ने बांटीं फर्जी नौकरियां
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 11 Jun 2015 01:00 AM IST
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एमएमजी अस्पताल के पूर्व सीएमएस के बेटे ने संविदा पर नौकरानी लगवाने के नाम पर बेरोजगारों से न केवल लाखों की नगदी ठग ली, बल्कि बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र देकर उन्हें अपने स्तर से ही काम पर भी लगा दिया गया।
किसी को शक न होने पाए इसके लिए बैंक में बेरोजगारों के सेलरी एकाउंट भी खुलवा दिए गए। आरोपी अपनी तरफ से ही हर महीने कुछ रुपये इन एकाउंट में वेतन के नाम पर डाल देता था।
आरोपी भी एमएमजी अस्पताल में ही ड्यूटी करता है। पता चला है कि आरोपी ने करीब 25 बेरोजगार युवकों से लाखों की ठगी की है। फर्जी नियुक्ति पत्र से किसी को माली तो किसी को फूड और ड्रग इंस्पेक्टर बना दिया गया।
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शास्त्रीनगर निवासी सतीश पाल, अंकुर सिंह, यशपाल सिंह के अनुसार वर्ष 2012 में वह संविदा पर नौकरी पाने के लिए पूर्व सीएमएस के बेटे के संपर्क में आए। संविदा पर नौकरी लगवाने के नाम पर आरोपी ने उनसे 6-6 लाख रुपयों की डिमांड की।
अंकुर ने बताया कि उसने पैसे दे दिए, मगर जब एक साल तक नौकरी नहीं लगी तो उसने अपने पैसे वापस मांगे। तभी उसे पता चला कि आरोपी ने कुछ और युवकों से भी नौकरी के नाम पर पैसे लिए हैं।
सभी ने दबाव बनाया तो आरोपी ने सभी को एडी हेल्थ और डीजी हेल्थ के फर्जी हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए। आरोपी ने उन्हें अपने अंडर में रखकर फील्ड से सेंपल एकत्र करने का काम भी सौंप दिया।
अंकुर के अनुसार पिछले दिनों जब उन्होंने नियुक्ति पत्र अपने मित्रों और रिश्तेदारों को दिखाने शुरू किए तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी हैं।
बुधवार को ठगी का शिकार हुए युवकों ने मामले की शिकायत सीएमओ से की। सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल ने मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
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किसी को शक न होने पाए इसके लिए बैंक में बेरोजगारों के सेलरी एकाउंट भी खुलवा दिए गए। आरोपी अपनी तरफ से ही हर महीने कुछ रुपये इन एकाउंट में वेतन के नाम पर डाल देता था।
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आरोपी भी एमएमजी अस्पताल में ही ड्यूटी करता है। पता चला है कि आरोपी ने करीब 25 बेरोजगार युवकों से लाखों की ठगी की है। फर्जी नियुक्ति पत्र से किसी को माली तो किसी को फूड और ड्रग इंस्पेक्टर बना दिया गया।
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शास्त्रीनगर निवासी सतीश पाल, अंकुर सिंह, यशपाल सिंह के अनुसार वर्ष 2012 में वह संविदा पर नौकरी पाने के लिए पूर्व सीएमएस के बेटे के संपर्क में आए। संविदा पर नौकरी लगवाने के नाम पर आरोपी ने उनसे 6-6 लाख रुपयों की डिमांड की।
अंकुर ने बताया कि उसने पैसे दे दिए, मगर जब एक साल तक नौकरी नहीं लगी तो उसने अपने पैसे वापस मांगे। तभी उसे पता चला कि आरोपी ने कुछ और युवकों से भी नौकरी के नाम पर पैसे लिए हैं।
सभी ने दबाव बनाया तो आरोपी ने सभी को एडी हेल्थ और डीजी हेल्थ के फर्जी हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए। आरोपी ने उन्हें अपने अंडर में रखकर फील्ड से सेंपल एकत्र करने का काम भी सौंप दिया।
अंकुर के अनुसार पिछले दिनों जब उन्होंने नियुक्ति पत्र अपने मित्रों और रिश्तेदारों को दिखाने शुरू किए तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी हैं।
बुधवार को ठगी का शिकार हुए युवकों ने मामले की शिकायत सीएमओ से की। सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल ने मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।