बैग में मासूम का शव, कुकर्म के बाद हत्या!
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दिल्ली के न्यू उस्मानपुर में हैंडलूम के कारोबारी के पांच साल के बेटे का अपहरण कर उसकी हत्या करने का मामला सामने आया है।
बच्चा बृहस्पतिवार को घर के बाहर खेलते हुए गायब हो गया था। शुक्रवार सुबह उसका शव गोकलपुरी में सड़क पर एक बैग में मिला है।
उसके शरीर पर चोट के कई निशान हैं। पुलिस ने बच्चे के साथ कुकर्म की घटना से इंकार नहीं किया है। पुलिस ने अपहरण और हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।
बच्चे के साथ कुकर्म का शक
बधुरम गुप्ता उर्फ वासु (5) पिता मुकेश गुप्ता, मां भावना और दो बहनों के साथ ब्रह्मपुरी गली संख्या 13 में रहता था। वह यमुना विहार स्थित केंटबरी स्कूल में प्री नर्सरी का छात्र था।
मुकेश गुप्ता का हैंडलूम का कारोबार है। वासु के चाचा गौरव गुप्ता ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर को स्कूल से आने के बाद वह खेलने के लिए घर से बाहर गया था।
शाम को जब वह वापस नहीं लौटा तो उन लोगों ने पार्क में उसकी तलाश की, जहां बच्चों ने बताया कि वासु वहां आया ही नहीं। देर रात उसकी गुमशुदगी की शिकायत उस्मानपुर थाने में की गई थी। शुक्रवार को उसका गोकलपुरी में सड़क पर उसका शव मिला। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि कुकर्म हुआ है या नहीं।
परिचित ने की हत्या!
पुलिस का कहना है कि वासु बृहस्पतिवार को किसी युवक के साथ देखा गया था। आशंका है कि आरोपी ने परिचित होने का फायदा उठाया और उसे अपने साथ ले गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार वालों से पूछताछ कर रंजिश के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। बताया जा रहा है कि वासु के पिता ने अपनी फैक्टरी से कुछ कर्मचारियों को काम से हटा दिया था। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।
परिजनों का आरोप है कि बच्चे के गायब होने के कुछ देर बाद ही उन लोगों ने थाने में इसकी सूचना दे दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिसकर्मियों ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया, लेकिन उसको तलाशने की जहमत नहीं उठाई। परिवार वाले खुद ही रात भर बाइक से आसपास के इलाकों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों व रेलवे स्टेशनों पर बच्चे को तलाशते रहे।
‘मेरे बच्चे का क्या कसूर था’
‘मेरे बच्चे का क्या कसूर था।’ इन शब्दों के साथ ही वासु की मां भावना बेहोश हो जाती हैं। उसकी मौत की खबर सूनने के बाद से उसकी तबियत बिगड़ने लगी है। परिवार के अन्य सदस्य भी अपने को संभाल नहीं पा रहे हैं।
वासु के दादा मीठालाल ने बताया कि वो उनके जिगर का टुकड़ा था। अब भी उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है।
वह कहते हैं कि स्कूल से आने के बाद वह सीधा उनके पास आता था और उनसे लिपट कर स्कूल की बातें बताता था। यह सब अब यादों में ही रहेगा। वहीं, वासु के पिता का कहना है कि वासु का इतने दिन तक ही साथ था।