बैंक से धोखाधड़ी में पूर्व चीफ मैनेजर को चार साल कैद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भ्रष्टाचार व बैंक से दो करोड़ की धोखाधड़ी मामले में पूर्व मुख्य प्रबंधक व अन्य शख्स को विशेष सीबीआई अदालत ने चार साल कैद की सजा सुनाई है। मामला नांगल राया स्थित स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर व जयपुर का है।
दिल्ली की द्वारका जिला अदालत के विशेष सीबीआई जज राम प्रकाश पांडेय ने पूर्व मुख्य प्रबंधक श्रीकांत चावला (65) व निजी फर्म के मालिक राकेश कुमार विज (61) को धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए कैद व एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अदालत ने दूसरी ओर संदेह का लाभ देते हुए मामले में आरोपी राजबल त्यागी, धीरज प्रसाद व भूपेंद्र पाल सिंह बख्शी को बरी कर दिया है। इस मामले में आरोपी स्याल को अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
फर्जी दस्तावेजों पर लिया था लोन
अदालत ने दोषियों को सजा सुनाते हुए कहा कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज, बोगस जमानती व फर्जी टाइटल डीड के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से धोखाधड़ी की।
श्रीकांत चावला ने धोखाधड़ी से खुद व अन्य आरोपियों के फायदे के लिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। राकेश कुमार विज ने फर्जी दस्तावेज का फायदा उठाकर 37 लाख का लोन हासिल कर लिया जबकि वह असल में कोई कारोबार नहीं करता था।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि वीरेंद्र कुमार स्याल की गारमेंट व ज्वेलरी एक्सपोर्ट कंपनी ने डेविस कॉरनेट इंटरनेशनल ने आठ जनवरी 2005 ने बैंक की सुलभ व्यापार ऋण योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन को चावला ने मंजूर कर दिया था। आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए थे।