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धौलाकुआं गैंगरेप: 10 अक्तूबर को आएगा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Sep 2014 11:34 PM IST
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दिल्ली के धौलाकुआं में बीपीओ कर्मी से सामूहिक दुष्कर्म मामले में अभियोजन पक्ष ने बुधवार को बचाव पक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया।
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अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसे आरोपी के खिलाफ मिले साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने व प्लांट करने की कोई जरूरत नहीं थी। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला दस अक्तूबर तक सुरक्षित रख लिया है।
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मामला 24 नवंबर 2010 को आरोपियों द्वारा बीपीओ कर्मी को धौला कुआं थाना इलाके से मेती बाग गुरुद्वारा के नजदीक से अगवा कर उससे सामूहिक दुष्कर्म का है। सोमवार को अदालत का फैसला आने से पहले बचाव पक्ष ने लिखित दलीलें पेश कर पुलिस पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।
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द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट के समक्ष लोक अभियोजक सतविंदर कौर ने बहस करते हुये कहा कि बचाव पक्ष के आरोप निराधार हैं। पुलिस साक्ष्यों से छेड़छाड़ क्यों करेगी। पुलिस द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई संभाना नहीं है।
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मामले में आरोपी दुष्कर्म के दो-तीन बाद गिरफ्तार हुए थे। पुलिस केवल उस्मान की पैंट पर ही खून क्यों लगायेगी, अगर लगाना होता तो सभी आरोपियों की पैंट पर लगा सकती थी।
बचाव पक्ष ने सोमवार को लिखित दलीलें पेश कर कहा था कि पीड़िता के खून के नमूने बाद में प्लांट किये गये। अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव तर्क पेश करते हुये कहा कि डॉक्टरी जांच के दौरान 24 नवंबर 2010 को पीड़ित के शरीर से डॉक्टर कविता सोनी ने केवल ग्यारह सैंपल उठाये थे।
इनमें दस सैंपल को एक बॉक्स में रखा था जबकि पीड़ित के कपड़े व अंडर गारमेंट एक अलग लिफाफे में रखे गये थे। इन सैंपल में पीड़िता के खून के नमूने शामिल नहीं थे।
जांच अधिकारी ने उसी दिन सफदजंग अस्पताल में सीजर मेमो बनाया और उसने इसमें 12 सैंपल का जिक्र किया। इनमें 12 वां सैंपल पीड़िता के खून के नमूने का था। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राजकुमारी का दावा था कि यह सीजर मेमो अस्पताल में बनाया गया लेकिन इस डॉक्टर या किसी अन्य स्टाफ का हस्ताक्षर नहीं है।
अधिवक्ता श्रीवास्तव का आरोप था कि उनके मुव्वकिल की गिरफ्तारी के बाद उसकी पेंट पर पीड़ित का खून लगाया गया और उसका सैंपल लिया गया। जांच के दौरान पीड़िता ने किसी भी बाहरी चोट से इंकार किया था। डॉक्टर कविता सोनी ने भी उसके खून का सैंपल नहीं लिया था।