जासूसी मामले में एक और मॉड्यूल का खुलासा, चर्चित नेताओं के निकलवाए थे सीडीआर
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सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकलवाकर जासूसी करने के मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक और मॉड्यूल का खुलासा किया है। अपराध शाखा ने इस संबंध में जयपुर पुलिस के एक एसआई समेत चार लोगों को दबोचा है।
आरोपियों के पास से एक कंप्यूटर, पांच लैपटॉप और चार महंगे मोबाइल बरामद हुए हैं, जिन्हें ये वारदात में इस्तेमाल करते थे। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि दिल्ली के जहांगीरपुरी निवासी कुलदीप सोनी के पास 31 मई 2016 को एक एसएमएस आया था।
मैसेज भेजने वाले ने दावा किया था कि वह किसी की भी सीडीआर निकलवा सकता है। कुलदीप ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया और अपने बेटे के फोन नंबर की छह माह की सीडीआर मांगी।
इसके लिए आरोपी ने आठ हजार रुपये की मांग की। सौदा होने पर दो दिन में आरोपी ने कुलदीप को उसके बेटे की सीडीआर मुहैया करवा दी। कुलदीप ने अपराध शाखा से शिकायत की कि आरोपियों ने अवैध तरीके से सीडीआर निकलवाकर दी। इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
जानिए कैसे देते थे वारदात को अंजाम
अपराध शाखा ने मामले की छानबीन शुरू की। एसएमएस वाले नंबर की जांच करने पर पता चला कि नंबर पुणे में किसी अनिकेत नामक शख्स के पास है। पुलिस ने 15 जुलाई को पुणे, महाराष्ट्र से आरोपी अनिकेत प्रकाश धामले उर्फ हर्ष नायडू (25) को दबोच लिया।
उसके पास से वह मोबाइल बरामद हुआ, जिससे एसएमएस करता था। पुलिस पूछताछ में अनिकेत ने बताया कि उसे सीडीआर मुंबई में डिटेक्टिव एजेंसी चलाने वाला अभिनव कुमार मुहैया करवाता है।
पुलिस ने 17 जुलाई को अभिनव कुमार (35) को मुंबई से दबोच लिया। इसके बाद मुख्य आरोपी गजराज सिंह (23) और जयपुर पुलिस के एसआई मुकेश कुमार मीणा (38) की गिरफ्तारी जयपुर से हुई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। मुकेश ने बताया कि वह गजराज को 2000 से अधिक सीडीआर बेच चुका है।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
अनिकेत पुणे में अपनी डिटेक्टिव एजेंसी चलाता है। वह सीडीआर निकलवाने के लिए लोगों को एसएमएस भेजता था। इसके बाद इच्छुक लोग उससे संपर्क करते थे। अनिकेत सीडीआर के लिए नंबर लेकर अभिनव को भेजता था।
अभिनव उस नंबर को जयपुर में गजराज को भेज देता था। गजराज बाद में नंबर एसआई मुकेश को दे देता था। 1600 रुपये लेने के बाद ई-मेल या व्हाट्सऐप के जरिये मुकेश सीडीआर गजराज को देता था। इसके बाद गजराज 3500 रुपये लेकर इसे अभिनव को देता था। अभिनव इसे 5000 हजार रुपये में अनिकेत को बेचता था। अनिकेत आठ से 12 हजार रुपये में सीडीआर लोगों को बेच देता था।
चर्चित लोगों की सीडीआर निकलवाने की आशंका
पुलिस की मानें, तो गैंग का सरगना गजराज जयपुर स्थित एक कॉलेज से बीसीए अंतिम वर्ष का छात्र है। वह किसी भी ई-मेल, फेसबुक अकाउंट और अन्य साइट को हैक करने का दावा करता है।
2013 से वह जयपुर स्थित नेहरू नगर के पुलिस अधिकारियों को असिस्ट कर रहा था। अनिकेत और अभिनव हैकिंग का काम करते हैं। वहीं, मुकेश कुमार मीणा 2005 में राजस्थान पुलिस में एसआई पद पर भर्ती हुआ था। फिलहाल वह साइबर सेल जयपुर में तैनात था। मुकेश एमकॉम है और अगले महीने वह इंस्पेक्टर बनने वाला था। इसके लिए उसकी ट्रेनिंग भी चल रही थी।
सरकारी मेल का भी करते थे इस्तेमाल
पुलिस का कहना है कि गजराज पिछले छह-सात महीने में सीडीआर बेचकर 20 लाख रुपये से अधिक कमा चुका है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मुकेश ने सरकारी ई-मेल आईडी से भी गजराज और अन्य को सीडीआर निकलवाकर भेजा था। इन लोगों ने कई फर्जी ई-मेल आईडी भी बनाई थी। इसके अलावा कई बैंक खाते भी खोले थे, जिनके जरिये रुपयों का लेन-देन करते थे।
चर्चित लोगों की सीडीआर निकलवाने की आशंका
पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने बड़े कारोबारियों और नेताओं के सीडीआर निकलवाए हैं। हालांकि पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि ज्यादातर सीडीआर रंजिश, प्रेम प्रसंग, घरेलू विवाद, कानूनी विवाद, रिश्तों आदि के लिए ही निकलवाए गए।
कानपुर गैंग की गिरफ्तारी के बाद हो गए थे सावधान
पुलिस की मानें, तो सीडीआर मामले में कानपुर एसएसपी ऑफिस में तैनात नरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद ये आरोपी सावधान हो गए थे। इन लोगों ने अपने-अपने पुराने रिकॉर्ड डिलीट कर दिए थे।