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हादसों का टूटा रिकॉर्ड, यहां सुरक्षित सफर की कोई गारंटी नहीं

Thu, 02 Jun 2016 01:45 AM IST
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 02 Jun 2016 01:45 AM IST
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Broken the record of incidents, not a guarantee of a safe journey
जिले की सरहद में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हादसे रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन और परिवहन विभाग के प्रयास बौने साबित हो रहे हैं। जिला पुलिस के आंकड़े सरकारी तंत्र की लापरवाही की पोल खोल रहे हैं।
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साल की पहली तिमाही में ही 171 सड़क हादसे हो गए हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 170 था। पुलिस की तिमाही रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। हादसों में कमी लाने के लिए कई कदम उठाए गए, लेकिन इसका असर जिले में दिखाई नहीं दे रहा है।
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एक्सप्रेस-वे हो या नेशनल हाईवे या फिर शहर की सड़कें, हर रोज दो से तीन हादसे हो रहे हैं और रोजाना करीब एक व्यक्ति को जान गंवानी पड़ रही है। साल की पहली तिमाही में सड़क हादसों का आंकड़ा 171 दर्ज किया गया है।
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इसमें 51 लागों ने अपनी जान गंवाई और 176 लोग घायल हो गए। पिछले वर्ष पहली तिमाही के पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 41 लोगों ने जान गंवाई थी, यह आंकड़ा इस साल बढ़कर 51 पहुंच गया है।  हादसों पर अंकुश लगाने के तमाम दावे किए गए, लेकिन तीसरी तिमाही में हुए हादसों ने सरकारी दावों की हवा निकालकर रख दी।

पैदल चलना नहीं सुरक्षित
पुलिस की तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक सड़क हादसों में सबसे ज्यादा पैदल राहगीर बेलगाम वाहनों का निशाना बने हैं। हादसों में मरने वाले 50 फीसदी से ज्यादा पैदल चलने वाले रहे। इसके अलावा गलत दिशा में दौड़ते वाहन भी हादसों का कारण बने। साल 2015 में सड़क हादसों में 200 से ज्यादा मौत हुई थीं, जिसमें से ज्यादा 120 से ज्यादा मौत पैदल चलने वालों की हुई।

अंदरूनी सड़कें ज्यादा असुरक्षित

Broken the record of incidents, not a guarantee of a safe journey

अंदरूनी सड़कें ज्यादा असुरक्षित
अगर बात करें असुरक्षित सड़कों की तो शहर के अंदरूनी मार्ग सबसे खतरनाक बताए गए हैं। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 36 मौत अंदरूनी सड़कों पर हुई जबकि 15 मौत नेशनल हाईवे पर हुई।

एफओबी से टलेगा हादसों का खतरा
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक सड़क पार कराने के लिए एफओबी (फुटओवर ब्रिज) बनने के बाद सड़क हादसों पर भी अंकुश लग सकेगा। शहर में केवल एक ही एफओबी है, जो बदरपुर बॉर्डर पर सराय ख्वाजा के पास है। शहर की अंदरूनी सड़कों पर कहीं कोई एफओबी नहीं हैं। इन हादसों का शिकार कई बार सड़क पार करने वालों को होना पड़ा तो कई बार सड़क पार करने वालों की वजह से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए।

सड़क हादसों के आंकड़े

2015                  2016
जनवरी               
केस दर्ज-62         केस दर्ज-53
मौत---15           मौत---16
घायल--60          घायल--52

फरवरी 
केस दर्ज-49         केस दर्ज-53
मौत----09         मौत----14
घायल---51         घायल---50

मार्च
केस दर्ज-59         केस दर्ज-65
मौत----17         मौत----21
घायल---61        घायल---74

शहर के ज्यादातर फुटपाथों पर अवैध कब्जे हैं। जिस कारण लोग रोड पर चलने को मजबूर हैं। इसी कारण पैदल चलने वाले लोग हादसो की चपेट में आते हैं। हादसे कम हो और लोगों की जान न जाए। इसके लिए  हमारी टीम और ट्रैफिक पुलिस काम कर रही है। हादसों को रोकने के लिए और यातायात नियमों का पालन करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।  -एसके शर्मा , वरिष्ठ उपाध्यक्ष- रोड सेफ्टी ओर्गेनाइजेशन
 

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