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छात्रों के लिए तरस रहे ग्रेनो के कई कॉलेज, कभी दाखिले पर रहती थी मारामारी
सीएल मौर्य/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 04 Aug 2016 12:01 AM IST
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एजुकेशन हब के रूप में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके ग्रेटर नोएडा के उच्च शिक्षण संस्थान इस वर्ष छात्रों की बाट जोह रहे हैं।
कभी इन कॉलेजों में दाखिले को लेकर लंबी लाइन लगती थीं, इसका फायदा उठाकर कुछ प्रतिष्ठित कॉलेज मोटा डोनेशन भी वसूल रहे थे, लेकिन आज स्थिति इसके उलट हो गई है।
चौथे राउंड की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी कई कॉलेजों का खाता तक नहीं खुला है। वहीं, कई कॉलेजों में खाता न खुलने से उनके बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। बीटेक से ज्यादा एमसीए की स्थिति खराब है। एमसीए का भी कई कॉलेजों में खाता नहीं खुला है।
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ग्रेटर नोएडा में 25 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें से कुछ प्रतिष्ठित कॉलेजों को छोड़ दें, तो बाकी में नए शैक्षिक सत्र में खाता भी नहीं खुला है, जबकि चौथे राउंड की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है।
आंकड़ों की बात करें तो नामीगिरामी कॉलेजों की सीटें भी काउंसिलिंग के जरिये महज 30 प्रतिशत से अधिक नहीं भर पाई हैं। पांचवें राउंड की चल रही काउंसिलिंग से बहुत ज्यादा 10 प्रतिशत सीटें भरने की उम्मीद है।
शहर के कॉलेजों से छात्रों का मोहभंग होने से 10 से अधिक कॉलेजों का खाता नहीं खुला है। डॉ. एपीजे टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने चौथे राउंड की काउंसिलिंग तक की जो सूची जारी की है, उसमें कुछ कॉलेज तो ऐसे भी हैं, जिनकी एक-दो सीटें ही भरी हैं।
मैनेजमेंट कोटे से कितनी सीटें भर पाएंगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। नामीगिरामी कॉलेजों के मालिक भी सीट न भरने से परेशान हैं। कभी इन कॉलेजों में दाखिले को लेकर मारामारी का माहौल रहता था। दूसरे मैनेजमेंट कोटे से होने वाले दाखिले में मोटा डोनेशन भी मिलता था।
आईआईएमटी कॉलेज के एमडी मयंक अग्रवाल का कहना है कि छात्रों का रुझान साउथ के कॉलेजों की तरफ बढ़ गया है। छात्र वहां का पाठ्यक्रम बेहतर मानते हैं। दूसरा कारण यह भी है कि यूपी में कॉलेजों की संख्या बढ़ गई है।
शारदा यूनिवर्सिटी के ज्वाइंट रजिस्ट्रार अजीत कुमार का कहना है कि कॉलेजों में हर साल फीस बढ़ रही है, लेकिन छात्रों को उस स्तर की नौकरी नहीं मिल रही है। बड़े संस्थान तो ट्रेनिंग दिलाकर छात्रों को कुछ काबिल बना देते हैं, लेकिन छोटे संस्थान ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रेनो के कॉलेजों से मोहभंग होने का कारण
1. प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की भरमार, घर के नजदीक कॉलेज होने की वजह से छात्र नहीं जाना चाहते दूर।
2. शिक्षा के स्तर में गिरावट भी एक वजह।
3. प्लेसमेंट की कमी।
4. साउथ में बेहतर पाठ्यक्रम के चलते छात्रों का ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों से मोहभंग।
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कभी इन कॉलेजों में दाखिले को लेकर लंबी लाइन लगती थीं, इसका फायदा उठाकर कुछ प्रतिष्ठित कॉलेज मोटा डोनेशन भी वसूल रहे थे, लेकिन आज स्थिति इसके उलट हो गई है।
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चौथे राउंड की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी कई कॉलेजों का खाता तक नहीं खुला है। वहीं, कई कॉलेजों में खाता न खुलने से उनके बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। बीटेक से ज्यादा एमसीए की स्थिति खराब है। एमसीए का भी कई कॉलेजों में खाता नहीं खुला है।
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ग्रेटर नोएडा में 25 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें से कुछ प्रतिष्ठित कॉलेजों को छोड़ दें, तो बाकी में नए शैक्षिक सत्र में खाता भी नहीं खुला है, जबकि चौथे राउंड की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है।
आंकड़ों की बात करें तो नामीगिरामी कॉलेजों की सीटें भी काउंसिलिंग के जरिये महज 30 प्रतिशत से अधिक नहीं भर पाई हैं। पांचवें राउंड की चल रही काउंसिलिंग से बहुत ज्यादा 10 प्रतिशत सीटें भरने की उम्मीद है।
शहर के कॉलेजों से छात्रों का मोहभंग होने से 10 से अधिक कॉलेजों का खाता नहीं खुला है। डॉ. एपीजे टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने चौथे राउंड की काउंसिलिंग तक की जो सूची जारी की है, उसमें कुछ कॉलेज तो ऐसे भी हैं, जिनकी एक-दो सीटें ही भरी हैं।
मैनेजमेंट कोटे से कितनी सीटें भर पाएंगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। नामीगिरामी कॉलेजों के मालिक भी सीट न भरने से परेशान हैं। कभी इन कॉलेजों में दाखिले को लेकर मारामारी का माहौल रहता था। दूसरे मैनेजमेंट कोटे से होने वाले दाखिले में मोटा डोनेशन भी मिलता था।
आईआईएमटी कॉलेज के एमडी मयंक अग्रवाल का कहना है कि छात्रों का रुझान साउथ के कॉलेजों की तरफ बढ़ गया है। छात्र वहां का पाठ्यक्रम बेहतर मानते हैं। दूसरा कारण यह भी है कि यूपी में कॉलेजों की संख्या बढ़ गई है।
शारदा यूनिवर्सिटी के ज्वाइंट रजिस्ट्रार अजीत कुमार का कहना है कि कॉलेजों में हर साल फीस बढ़ रही है, लेकिन छात्रों को उस स्तर की नौकरी नहीं मिल रही है। बड़े संस्थान तो ट्रेनिंग दिलाकर छात्रों को कुछ काबिल बना देते हैं, लेकिन छोटे संस्थान ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रेनो के कॉलेजों से मोहभंग होने का कारण
1. प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की भरमार, घर के नजदीक कॉलेज होने की वजह से छात्र नहीं जाना चाहते दूर।
2. शिक्षा के स्तर में गिरावट भी एक वजह।
3. प्लेसमेंट की कमी।
4. साउथ में बेहतर पाठ्यक्रम के चलते छात्रों का ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों से मोहभंग।