'सिंघम' नहीं 'वसूली भाई' निकले दरोगा जी: रौब जमाने के लिए इस तरह जाते थे शहर, असली पुलिस के सामने बोलती बंद
आरोपी फर्जी दरोगा ने दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर की पांच वर्दी बनवा रखीं थीं। गांव के लोगों को उसने बताया कि वह दिल्ली पुलिस में दरोगा है। वह घर से वर्दी पहनकर बाइक पर निकलता था।
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गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस के एक फर्जी दरोगा को गिरफ्तार किया है। आरोपी लोनी और ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने की एवज में वसूली करता था। पुलिस ने उसके पास से पांच जोड़ी वर्दी, स्टार और फर्जी परिचय पत्र बरामद किया है। क्राइम ब्रांच के निरीक्षक अब्दुरर्हमान सिद्दीकी ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एसीपी क्राइम ब्रांच अजित कुमार रजक ने बताया कि फर्जी दरोगा बनकर वसूली करने वाला योगेश शर्मा (49) सिर्फ 10वीं पास है। मूलरूप से शामली जिले के भूरा कंडेला का रहने वाला योगेश फिलहाल बागपत जिले में खेकड़ा तहसील के गांव गोठरा में रह रहा है। पढ़ाई के बाद उसने ड्राईविंग सीखी और दिल्ली में प्राईवेट बस चलाने लगा था। प्राइवेट बसों का संचालन बंद हो जाने पर रुपये उधार लेकर अपनी बस खरीद ली। घाटा होने पर हरिद्वार भाग गया। यहां तीन साल तक सतसंग आश्रम में रहा। तीन वर्ष बाद लौटकर इंदिरापुरम में बस पर ड्राइवर की नौकरी करने लगा।
एसीपी ने बताया कि इसकी गलत आदतों की वजह से पत्नी ने भी उसे छोड़ दिया। इसके बाद वह खेकड़ा के गांव गोठरा में जाकर रहने लगा। यहां इसे रुपये कमाने का आईडिया सूझा और उसने दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर की पांच वर्दी बनवा लीं। गांव के लोगों को उसने बताया कि वह दिल्ली पुलिस में दरोगा है।
घर से वर्दी पहनकर बाइक पर निकलता था आरोपी
आरोपी ने दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर की पांच वर्दी बनवा रखीं थीं। गांव के लोगों को उसने बताया कि वह दिल्ली पुलिस में दरोगा है। वह घर से वर्दी पहनकर बाइक पर निकलता था और लोनी, ट्रॉनिका सिटी, लोनी बॉर्डर व इन से सटे दिल्ली के आसपास के थानों में अपने एक साथी के साथ मिलकर विवादित संपत्तियों के मामलों की जानकारी करता था। इसके बाद दोनों पक्षों को डरा-धमकाकर निपटारा करने लगा। इसके एवज में वह अवैध वसूली करता था।
विवादित संपत्ति मालिकों को दिखाता था रौब
पुलिस के मुताबिक योगेश का डील-डौल अच्छा है। इसी का फायदा उठाकर उसने फर्जी दरोगा बनने का फैसला किया। उसने दिल्ली पुलिस का फर्जी परिचय पत्र भी बनवा लिया था। जरूरत पड़ने पर वह उसे दिखाकर न सिर्फ विवादित संपत्तियों के मालिकों पर रौब झाड़ता था, बल्कि कभी मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी दबाव बनाता था।