फूट-फूट कर रोए श्रीसंत, अंकित ने मुट्ठी में पकड़ा था लॉकेट
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आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में नाम आने के बाद मैदान से बाहर हुए क्रिकेटर श्रीसंत की वापसी का रास्ता शनिवार शाम अदालती फैसले से खुल गया। अदालत का फैसला सुनकर श्रीसंत फूट-फूट कर रोने लगे।
स्पॉट फिक्सिंग मामले में नाम आने के बाद श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया था। शनिवार को फैसला आने के बाद अदालत में आरोपियों व उनके साथियों ने एक दूसरे को गले लगाकर अपनी खुशी बांटी और बधाई दी।
कोर्ट रूम में मौजूद स्पेशल सेल के अतिरिक्त उपायुक्त मनीषी चंद्रा व उनकी टीम के अन्य सदस्य अदालत के फैसले से हैरान नजर आए और उन्होंने फैसले की कॉपी के बाद ही कोई निर्णय लिए जाने की बात कही।
फैसले से पूर्व सुनवाई के दौरान श्रीसंत आंखें बंद करके मंत्र का जाप करते हुए दिखे तो अंकित ने गले में पहना अपना लॉकेट मुट्ठी में बंद कर लिया था और आंखें बंद कर रखीं थीं।
पुलिस ने श्रीसंत को 16 मई 2013 को गिरफ्तार किया था और अदालत से उन्हें 10 जून 2013 को जमानत मिल गई थी।
मकोका तो क्या, किसी कानून में मामला नहीं बनता : कोर्ट
आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ मकोका तो दूर किसी भी कानून में कोई मामला नहीं बनता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीना कृष्णा बंसल ने कहा कि अगर अभियोजन के सारे सबूतों पर भरोसा कर लिया जाए तब भी यह साबित नहीं होता कि दाऊद इब्राहिम व छोटा शकील का कोई क्राइम सिंडिकेट है, जो सट्टेबाजी व मैच फिक्सिंग में शामिल है।
उसके पैसे का हवाला के जरिये लेनदेन हो रहा था। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी का क्राइम सिंडिकेट के तौर पर डॉ. जावेद चुटानी के साथ गठजोड़ साबित नहीं हुआ है।
अदालत ने 151 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा है कि क्राइम सिंडिकेट लगातार गैर कानूनी गतिविधि में शामिल था क्योंकि पिछले दस सालों में उसके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है जो कि मकोका लगाने के लिए जरूरी है।
डी कंपनी से जोड़े थे फिक्सिंग के तार
यह मामला शुरू से ही सुर्खियों में रहा था। मामले की जांच पर तत्कालीन पुलिस आयुक्त नीरज कुमार खुद नजर रखे हुए थे। रिटायर होने के बाद नीरज कुमार बीसीसीआई में अपनी सेवा दे रहे हैं।
मामले की जांच से जुड़े स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर बद्रीश दत्त व उनकी मित्र गीता की उनके गुड़गांव स्थित फ्लैट पर संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
पुलिस ने चार्जशीट में कहा कि आईपीएल-6 में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम व छोटा शकील के इशारे पर स्पॉट फिक्सिंग हुई। फिक्सिंग में हर आदेश दाऊद इब्राहिम का होता था जो कि उसके गुर्गों के जरिए बुकियों और फिर खिलाड़ियों तक पहुंचता था।
हाईकोर्ट जाएगी दिल्ली पुलिस
कब फिक्स ओवर फेंकना है और ओवर में कितने रन देने हैं, इन सारी बातों का निर्णय दाऊद करता था। उसके आदेश को पूरा करवाने में पाकिस्तानी बुकी जावेद चुटानी और सलमान अंजाम देते थे।
उसके बाद भारत में अश्विनी अग्रवाल, सुनील भाटिया, रमेश अग्रवाल, अजीत चंदीला बुकिंग और फिक्सिंग के काम को अंजाम देते थे। खिलाड़ियों और बुकियों के बीच अजीत चंदीला कड़ी का काम करता था।
दिल्ली पुलिस आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के आरोपियों को बरी करने के पटियाला कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त(स्पेशल सेल) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने तफ्तीश की है उसे मुदगल कमेटी ने बारीकी से देखा था और उसका अध्ययन किया था।
पुलिस ने पेश किए 168 गवाह
मुदगल कमेटी ने दिल्ली पुलिस की तफ्तीश की काफी सराहना की थी। कमेटी ने पुलिस की जांच के आधार पर अपना महत्वपूर्ण फैसला दिया था।
अब देखना यह है कि दिल्ली पुलिस को मामले को अदालत में रखने में कहां और क्या कमी रह गई। इसको लेकर अध्ययन किया जाएगा।
आईपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने अदालत में छह हजार पन्नों की भारी भरकम चार्जशीट पेश की थी। साथ ही दो सौ से ज्यादा दस्तावेज संलग्न किए थे।
दिल्ली पुलिस ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के तौर पर 168 लोगों का नाम दिया था। इनमें क्रिकेटर राहुल द्रविड़, सिद्धार्थ त्रिवेदी, हरमीत सिंह, संजय जगदाले आदि प्रमुख थे।
चार्जशीट में 295 दस्तावेज की सूची भी दी थी। इनमें बैंक खातों की जानकारी, मोबाइल कॉल डिटेल रिकार्ड, पार्टियों के बिल, खरीदारी के बिलों के अलावा जांच के दौरान जुटाए कंप्यूटर, लैपटॉप व हार्ड डिस्क की जानकारी भी दी गई थी।