डॉक्टरों की हड़ताल पर कोर्ट सख्त, कहा हजारों लोग परेशान हैं
हाईकोर्ट ने नगर निगम अस्पतालों में डॉक्टरों व नर्सों की हड़ताल के मुद्दे पर दिल्ली सरकार, नगर निगम डॉक्टर्स एसोसिएशन, रेजीडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन और नर्सेज एसोसिएशन सहित आठ को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
अदालत ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है कि नॉर्थ व ईस्ट एमसीडी द्वारा संचालित अस्पताल और डिस्पेंसरियों में डॉक्टरों व नर्सों की हड़ताल के कारण हजारों लोग परेशान हो रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने इसके अलावा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नॉर्थ व ईस्ट एमसीडी से भी जवाब मांगा है।
हड़ताल डॉक्टरों व नर्सों का मनमाना रवैया व गैरकानूनी है
याची यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अधिवक्ता सनप्रीत सिंह अजमानी ने कहा कि पिछले 72 घंटों से जारी हड़ताल से मरीज प्रताड़ित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल डॉक्टरों व नर्सों का मनमाना रवैया व गैरकानूनी है।
अदालत ने सभी पक्षों को 10 फरवरी तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि वह मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई फैसला देगी।
मालूम हो कि एमसीडी के सफाई कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद डॉक्टर व नर्सों ने भी वेतन इत्यादि की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है।
याचिका में सभी हड़ताली डॉक्टरों और नर्सों को तुरंत हड़ताल खत्म कर काम पर आने का निर्देश देेने व उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। याची ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार डॉक्टरों की हड़ताल अवैध है और मरीजों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।