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कोचिंग सेंटर केस : अदालत ने सीबीआई से पूछा- आप उन लोगों को जवाबदेह क्यों नहीं ठहराते जिन्होंने कमजोर गेट बनाया
Wed, 14 Aug 2024 02:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 14 Aug 2024 02:13 AM IST
सार
अदालत ने पूछा है कि आप उन लोगों को जवाबदेह क्यों नहीं ठहरा रहे हैं, जिन्होंने इतना कमजोर गेट बनाया? अदालत ने मामले में चार आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मुद्दा उठाया।
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Delhi Coaching Center Accident, file pic
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अदालत ने कोचिंग सेंटर में हुई मौतों के मामले में सीबीआई से जवाब-तलब किया है। पूछा है कि आप उन लोगों को जवाबदेह क्यों नहीं ठहरा रहे हैं, जिन्होंने इतना कमजोर गेट बनाया? अदालत ने मामले में चार आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मुद्दा उठाया। 28 जुलाई को ओल्ड राजिंदर नगर में एक आईएएस स्टडी सर्किल के बेसमेंट में पानी भर जाने से सिविल सेवा के तीन उम्मीदवारों की मौत हो गई थी।
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने बिल्डिंग के चार सह-मालिकों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा हमने फ्लाईओवर गिरने की खबरें सुनी हैं... अगर ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल करता है तो यह स्वाभाविक परिणाम है।
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जज घटना के दिन कोचिंग सेंटर के बाहर सड़क से पानी आने के बाद कोचिंग सेंटर के गेट के टूटने का जिक्र कर रहे थे। इससे बेसमेंट में पानी भर गया, जिससे यह त्रासदी हुई। पुलिस ने पहले कहा था कि मनोज कथूरिया नामक एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा अपनी एसयूवी को गली में चलाने के बाद सड़क से पानी कथित तौर पर गेट में घुस गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को फटकार लगाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने उसे जमानत दे दी थी।
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सोमवार को सह-मालिकों की ओर से पेश हुए वकील अमित चड्ढा ने अदालत को बताया पूरी संपत्ति व्यावसायिक है और इसका इस्तेमाल कोचिंग के लिए किया जा रहा है। आरोपी केवल ज़मीन के मालिक हैं। उन्होंने कभी भी बेसमेंट को लाइब्रेरी के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नहीं कहा। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी स्वेच्छा से पुलिस के पास गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
वकील ने यह भी कहा कि मालिकों के खिलाफ़ लापरवाही का मामला बनाया जा सकता है, न कि गैर इरादतन हत्या का। उन्होंने कहा कि बेसमेंट के सह-मालिकों को यह नहीं पता था कि छात्र डूब जाएँगे। हालांकि सीबीआई ने चड्ढा की दलीलों का खंडन किया। केंद्रीय एजेंसी ने कहा, आपको हर महीने चार लाख रुपये मिल रहे थे और आपके लापरवाह रवैए के कारण तीन मासूम बच्चों की जान चली गई।