पुलिस की ये कहानी, पढ़कर खुल जाएंगी आंखें
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दीवार साढ़े तीन फीट की थी और करीब छह फुट के पुलिस वाले उसके पीछे छिपकर आरोपियों की साजिश को सुन रहे थे। डकैती की साजिश के आरोप में तीन साल से मुकदमे का सामना कर रहे दस आरोपियों को अदालत ने पुलिस की कहानी को अविश्वसीनय बताते हुए बरी कर दिया।
पुलिस का कहना था कि आरोपी कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास एक पार्क में चलती बस में डकैती डालने की साजिश रच रहे थे और पुलिस वालों ने 15 फुट की दूरी से उनकी बातें सुनीं।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट ने पुलिस की थ्योरी को खारिज करते हुये कहा, इस बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि आरोपी कार से उतर कर सार्वजनिक स्थान पर गये और वहां तेज आवाज में डकैती की योजना बनाने लगे। आरोपी कार में बैठकर भी योजना बना सकते थे।
अदालत ने आरोपी भगवान दास, टिंकू, राखी, दीनदयाल, इंद्रजीत, विनोद, इम्तियाज, सूरज राज, राम चंदर व महेश कुमार को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष इन पर लगे आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा है।
कोर्ट ने कहा भरोसा करना मुश्किल
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि एसआई गणपति महाराज व हवलदार दयाल सिंह का दावा था कि उन्होंने 15 फीट की दूरी से आरोपियों को साजिश रचते हुए सुना।
करीब छह फीट का एसआई व अन्य दस पुलिसकर्मी साढ़े तीन फीट ऊंची दीवार के पीछे छिपकर आरोपियों की आवाज सुन रहे थे और उन पर आरोपियों की नजर नहीं पड़ी। इस बात पर भरोसा करना बेहद मुश्किल है।
अभियोजन के मुताबिक आरोपी शाहदरा से कार में आये थे। अदालत ने कहा कि वह सब एक साथ थे तो वह कार में बैठकर भी डकैती की योजना बना सकते थे। यह उनके लिए ज्यादा सुरक्षित व सुविधाजनक होता।
अभियोजन के मुताबिक पुलिस को 13 अप्रैल 2011 को मुखबिर ने बताया कि दस लोग शाहदरा से कार में आएंगे और उनकी योजना चलती बस में डकैती डालने की है। पुलिस ने इस सूचना के मद्देनजर ग्यारह लोगों की टीम बनाकर आरोपियों को डकैती की योजना बनाते समय पार्क से पकड़ लिया था।