कोर्ट ने कहा आपसी सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं'
व्यस्क महिला व पुरुष की आपसी सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं है। यह टिप्पणी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आरोपी युवक को बरी करते हुए की।
युवती ने बयान में कहा कि वह आरोपी से प्रेम करती थी और शादी करना चाहती थी। उन दोनों के बीच संबंध उसकी सहमति से बने थे।
कड़कड़डूमा जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरिता बीरबल ने कहा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपी ने युवती को धमकी दी या उसे निवस्त्र किया।
जानिए क्या है पूरा मामला
पीड़िता ने कहा कि उसके माता-पिता उसे जबरन आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने थाने लेकर गए थे। कोर्ट ने कहा जिस समय आरोपी व पीड़िता के बीच शारीरिक संबंध बने, उस समय लड़की की उम्र 18 साल से अधिक थी।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन के मुताबिक, पीड़िता ने आनंद विहार थाने में अक्तूबर 2015 में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का केस किया था। वह आरोपी को 1 साल से जानती थी।
उसने शिकायत में कहा कि आरोपी ने कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के पास उसका पर्स व मोबाइल छीन लिया और उसे जबरन अपनी बाइक पर बैठाया। फिर आरोपी ने युवती को वहां से ले जाकर दुष्कर्म किया। अश्लील तस्वीरें लीं और खुलासा करने पर जान से मारने की धमकी दी। सुनवाई के दौरान पीड़ित अपने बयान से पलट गई।