'केंद्र सरकार की महिला सुरक्षा में कोई रुचि नहीं है'
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हाईकोर्ट ने राजधानी में महिला सुरक्षा के लिए 16 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती में देरी करने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लगता है केंद्र सरकार की इसमें कोई रुचि नहीं है।
अदालत ने कहा कि बढ़ते अपराधों से लोग मर रहे हैं और इसे रोकने की दिशा में कुछ नहीं हो रहा है। मामले में अदालत ने केंद्रीय व्यय सचिव को 29 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राजधानी में कानून व्यवस्था में सुधार लाने के लिए पुलिसकर्मियों की भर्ती करने की दिशा में ठोस कदम न उठाने पर कड़ी नाराजगी जताई।
बताएं क्यों नहीं हो पा रही है पुलिसकर्मियों की भर्ती
अदालत ने कहा कि नए पुलिसकर्मियों की भर्ती के लिए गृहमंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। आखिर वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग भर्ती को मंजूरी क्यों नहीं प्रदान कर रहा। खंडपीठ ने कहा कि हम अतिरिक्त फोर्स की भर्ती पर इस लिए गंभीर है और कानून व्यवस्था व जांच प्रक्रिया अलग हो। आखिर दो मंत्रालयों के बीच बैडमिंटन का खेल कब तक चलेगा।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की इस मामले में रुचि नहीं है, यदि ऐसा है तो वह स्पष्ट बता दे हम इसका आदेश में उल्लेख कर देते हैं। यह मुद्दा काफी गंभीर है।
खंडपीठ ने कहा कि वसंत विहार गैंगरेप के बाद वर्ष 2012 से पुलिसकर्मियों की भर्ती का मामला आया था और तभी से हम बैडमिंटन खेल रहे है, यह कब तक चलेगा। न्यायमूर्ति अहमद ने कहा कि वर्ष 2003 में उन्होंने यह मामला उठाया था तभी से कुछ नहीं हो रहा।