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कोर्ट ने पूछा दिल्ली कैसे बने विश्वस्तरीय शहर

Sat, 28 Mar 2015 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Mar 2015 09:17 AM IST
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Court finally asked how to become a world-class city Delhi

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में सभी निकायों के बीच कामकाज को लेकर तालमेल न होने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि तालमेल न होने के कारण राजधानी की सुंदरता खराब हो रही है। अदालत ने केंद्र व दिल्ली सरकार से बताने को कहा है कि आखिर दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर कैसे बनाया जा सकता है।

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मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने विनोद कुमार बंसल द्वारा दायर जनहित याचिका पर अधिवक्ता सिताब अली के तर्क सुनने के बाद दिए अहम फैसले में कहा कि राजधानी में किसी भी एजेंसी के बीच तालमेल नहीं है। बिजली, टेलीफोन, केबल टीवी, गैस कंपनी व अन्य विभागों द्वारा तार डालने व सड़काें के निर्माण के बीच तालमेल नहीं है। अनधिकृत पार्किंग, हॉकर, वेंडर, खोके की भरमार है। यही कारण है कि राजधानी को सुंदर बनाने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा।
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योजनाओं को पूरा करने के लिए अब भी पुरानी तकनीक पर ही निर्भरता है। अदालत ने कहा कि इस याचिका में केंद्र सरकार को पक्ष नहीं बनाया गया, लेकिन उनका मानना है कि बिना केंद्र सरकार की भागीदारी के यह संभव नहीं है। अदालत ने मामले में केंद्र सरकार को पक्ष बनाते हुए केंद्र व दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे कि आखिर दिल्ली को किस प्रकार विश्वस्तरीय शहर बनाया जा सकता है।
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अशक्तों के लिए छह माह में हो पार्किंग व्यवस्था
अदालत ने सरकार व अन्य निकायों को निर्देश दिया कि मास्टर प्लान 2021 में किए गए प्रावधान का पालन किया जाए। अशक्तों की सुविधा के लिए सभी सरकारी भवनों जैसे अस्पताल, स्कूल इत्यादि में गेट के पास पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अदालत ने छह माह में यह व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसका टेंडर तुरंत रद कर दिया जाए।


आवाज वाली लाल बत्ती की हो व्यवस्था
अदालत ने सरकार व दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि छह माह में लाल बत्ती पर पैदल पार करने वालों के लिए आवाज वाली सिगनल लाइट लगानी चाहिए। वहीं सड़क पार करने के लिए कोई कट व अवरोध नहीं होना चाहिए। इससे नेत्रहीनों को परेशानी होती है। वहीं सरकारी भवनों में रैंप बनाए जाएं ताकि व्हील चेयर पर आने-जाने वालों को परेशानी न हो। राजधानी में अशक्तों की संख्या की जानकारी जुटाने को भी कहा।

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