जम्मू कश्मीर की धारा 370 की चुनौती याचिका पर फैसला सुरक्षित
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संविधान के अनुच्छेद 370 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ है।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान जम्मू कश्मीर राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि ऐसा ही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया था लेकिन उसने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
अधिवक्ता ने दावा किया कि याचिका वास्तव में राजनीति से प्रेरित है। इस पर प्रतिवाद करते हुए याचिकाकर्ता कुमारी विजयलक्ष्मी झा के वकील ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय के समक्ष उनके द्वारा उठाया गया मुद्दा उस मुद्दे से अलग है जो उच्चतम न्यायालय में पेश किया गया था।
दोनों पक्षों से कोर्ट ने मांगा लिखित ब्यौरा
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने जिरह के बाद दोनों पक्षों से उनके लिखित ब्यौरे एक सप्ताह के अंदर दाखिल करने को कहा।
याचिकाकर्ता में तर्क दिया गया कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान है जो कि वर्ष 1957 में राज्य की संविधान सभा के भंग होने के साथ ही समाप्त हो गया। याचिका के अनुसार, जो कुछ हो रहा है वह हमारे संविधान के मूल ढांचे, देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के तथा संसद की संप्रभुता के खिलाफ है।
मालूम हो कि जुलाई, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को धारा 370 के तहत दिए गए विशेष दर्जे की चुनौती देने संबंधी अपील खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा था।