पूर्व रेलमंत्री के हत्यारों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा
आखिरकार दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा के हत्यारोपियों को सजा सुनाई। 39 साल से कोर्ट में लंबित मामले में पिछले दिनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना दी गई।
जनवरी 1975 में तत्कालीन रेलमंत्री एलएन मिश्रा की बिहार के समस्तीपुर में हुए बम विस्फोट में मौत हो गई थी। तब मामला कोर्ट में था। पिछले सप्ताह सोमवार को अदालत ने आरोपियो पर दोषसिद्ध करते हुए 15 दिसंबर को सजा सुनाने की तारीख रखी थी।
लेकिन 15 दिसंबर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और अगली सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार का दिन सुनश्चित किया था। जिसपर सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को जिला न्यायाधीश विनोद गोयल ने चारों दोषियों गोपाल जी, रंजन द्विवेदी, संतोषानंद अवधूत और सुदेवानंद अवधूत को उम्रकैद की सजा सुनाई।
200 गवाहियों के बाद आया फैसला
गौरतलब है कि जनवरी 1975 में बिहार के समस्तीपुर में हिंदूपंथी संगठन आनंद मार्ग के चार अनुयायियों ने एक बम विस्फोट किया। जिसका निशाना तत्कालीन रेलमंत्री की जान लेना था। दरअसल, वे अपने एक गिरफ्तार नेता की रिहाई के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहते थे।
आनंद मार्ग के अनुयायी इसमें सफल भी रहे। विस्फोट में रेलमंत्री बुरी तरह से घायल हो गए। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की आरंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1979 में मामला दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में स्थानांतरित कर दिया।
तब 1981 में ही आरोपियों पर आरोप तय कर दिए। लेकिन बाद में न्यायिक प्रक्रिया अटक गई थी। इसके बिनाह पर आरोपी मामले को निरस्त करने की भी मांग कर रहे थे। लेकिन सितंबर 2012 में अदालत ने फिर सख्त रवैया अपनाते हुए मामले की नये सिरे से सुनवाई शुरू की।
इस हत्याकांड में अब तक 200 से अधिक गवाहों से पूछताछ, अभियोजन पक्ष के 161 और बचाव पक्ष के 40 से अधिक गवाहों के बयान सुने गए। इसके बाद अब यह फैसला आया है। गौर फर्माने वाली एक बात ये भी कि सुनवाई के दौरान ही एक आरोपी वकील रंजन द्विवेदी की मौत हो चुकी है।