निगम ने कहा शुरू हुई सफाई, NGT ने मांगा हलफनामा
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में मौजूद साईं उपवन क्षेत्र में कूड़े-कचरे की सफाई शुरू कर दी गई है। सोमवार को नगर निगम की ओर से दाखिल हलफनामे और तस्वीरों में यह दावा किया गया। वहीं याची ने कहा कि यह तस्वीरें बेंच को गुमराह करने के लिए हैं।
क्षेत्र में अब भी कई जगह कूड़ा बिखरा हुआ है। निगम गंभीरता से काम को अंजाम नहीं दे रही है। वहीं बेंच ने इस बहस के बाद नगर निगम से इस संबंध में सात दिनों के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। बेंच ने निगम से कहा है कि वह इस काम को पूरा करने के लिए समय सीमा भी बताए।
जस्टिस एमएस नांबियार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को सोसाइटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ इनवायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी (एसपीईएनबायो) की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अधिकारी भी पेश हुए। हालांकि याची सुशील राघव की ओर से पेश वकील राहुल चौधरी ने दावे को खारिज किया। वहीं बेंच ने भी निगम को फटकार लगाते हुए कहा कि वह जल्द से जल्द वन्य क्षेत्र की सफाई करवाए साथ ही इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।
हरित पट्टी में सिटी क्लब के निर्माण पर रोक लगा दी थी
बेंच ने बीती सुनवाई में वन्य क्षेत्र में कूड़े से संबंधित तस्वीरों पर गौर करने के बाद अपने निर्देश में कहा था गाजियाबाद नगर निगम के दायरे में आने वाला यह क्षेत्र सीवेज और कचरे से भरा हुआ है।
ट्रिब्यूनल के आदेश के बावजूद क्षेत्र की सफाई को लेकर निगम की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। बेंच ने निगम की लापरवाही को लेकर कहा था कि अभी तक प्राधिकरण की ओर से इस मामले में कोई जवाब भी नहीं दाखिल किया गया है।
याची एडवोकेट राहुल चौधरी के मुताबिक जिस इलाके में ठोस कचरे के साथ सीवेज निकासी की जा रही है वह इलाका मास्टर प्लान 2021 के तहत वन्य क्षेत्र अधिसूचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके में कूड़ा पाटने के लिए पेड़ों को भी गिराया जा रहा है। सीवेज ओवरफ्लो की स्थिति में है। पूरी तरह से वन्य क्षेत्र इलाके को बर्बाद कर दिया गया है। इलाके में अब तक 6 लाख पौधरोपण हुआ है। जबकि इनमें से बहुत कम ही पौधे और पेड़ सुरक्षित हैं।
मालूम हो कि एनजीटी ने गाजियाबाद में मौजूद हरित पट्टी में सिटी क्लब के निर्माण पर रोक लगा दिया था। साथ ही इस मामले में ग्रीन बेंच ने बीते वर्ष पर्यावरण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को नोटिस दिया था। याची ने सभी पर आरोप लगाया था कि मास्टर प्लान के तहत अधिकांश हरित पट्टी में जीडीए के जरिए अवैध निर्माण और अतिक्रमण किया जा रहा है।