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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष: कॉरपोरेट कंपनियां आमदनी संग दे रही बीमारियां

Thu, 07 Apr 2016 04:27 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 07 Apr 2016 04:27 PM IST
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corporate companies spreading disease with income

कॉरपोरेट कंपनियों में काम करने वाले लोग भले ही खुश और स्वस्थ नजर आते हों, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। एमएनसी (मल्टीनेशनल कंपनी) कल्चर युवाओं को अच्छी आमदनी के साथ बीमारियां भी दे रही हैं। इससे इन कंपनियों में काम करने वाले लोग कम उम्र में ब्लड प्रेशर (बीपी), डायबिटीज, स्पोंडिलाइटिस समेत अन्य बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

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करीब 80 फीसदी लोग किसी न किसी बीमारी की चपेट में हैं। इसके पीछे मुख्य कारण टारगेट और काम का दबाव है। 21 सेंचुरी नामक संस्था द्वारा किए गए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। 
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इस संस्था ने गुड़गांव के एमएनसी में काम करने वाले क्लास-वन से थ्री तक के 7500 लोगों पर करीब तीन महीने तक सर्वे किया। इसमें जनरल मैनेजर से लेकर एक्जीक्यूटिव क्लास के कर्मचारी शामिल किए गए। जिसमें पाया गया कि काम के दबाव और तनाव के कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
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इस सर्वेक्षण के मुताबिक एक दफ्तर में काम करने वाले कुल कर्मचारियों में से 80 फीसदी लोग किसी न किसी बीमारी की चपेट में हैं। सर्वे में पाया गया कि करीब 12 फीसदी अपनी अनियमित दिनचर्या और काम के तनाव आदि के कारण डायबिटीज के शिकार हैं।

कंप्यूटर पर लगातार काम करने के कारण लगभग 34 फीसदी आर्थोपीडिक यानी पीठ दर्द और ऑर्थराइटिस आदि से पीड़ित हैं। करीब 12 फीसदी को आंखों की बीमारी है। करीब 62 फीसदी को नाश्ते का समय या समय पर खाने का मौका नहीं मिलता है। जिससे 13 फीसदी को पाचन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस सर्वेक्षण में शामिल क्लास-टू से थ्री तक के 59 फीसदी को हर दिन आठ घंटे या उससे अधिक काम करना पड़ता है। टारगेट और वर्क प्रेशर की वजह से 11 फीसदी मानसिक बीमारियां जैसे डिप्रेशन आदि का शिकार हो गए हैं। करीब 14 फीसदी को बीपी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जबकि इनमें से 06 फीसदी हृदय संबंधी बीमारी से ग्रसित हैं।


संस्था के सीनियर एनालिस्ट डॉ. एसके मिनोचा ने बताया कि इस सर्वे का उद्देश्य केवल आरामदेह लगने वाली नौकरी के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को जानना था। सबसे अधिक दबाव क्लास-3 लेवल के एक्जीक्यूटिव और कर्मचारियों पर होता है। कुछ तो मजबूरी में नौकरी तक छोड़ने की बात करते हैं। इसके लिए काफी हद तक टारगेट और उसके लिए बॉस का दबाव और कामकाज का माहौल जिम्मेदार है।

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