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कोरोना वायरस को दूर भगा रहा ITBP का फौजी अनुशासन और दूध-दही-शाकाहार!

Mon, 23 Mar 2020 06:02 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 23 Mar 2020 06:02 PM IST
सार

  • ITBP के छावला स्थित क्वारंटीन केंद्र में 1023 लोग, 518 इलाज बाद गए घर
  • आए लोगों में कोरोना का डर भगाने के लिए ली जाती है मनोवैज्ञानिक और काउंसलर से मदद

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CoronaVirus: Military Discipline of ITBP helping to fight against infection
CoronaVirus: ITBP Isolation centre - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोरोना से लड़ने के लिए आईटीबीपी के छावला स्थित परिसर में देश का सबसे बड़ा क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। यहां पर चीन, इटली और दूसरे देशों से एक हजार लोग क्वारंटीन के लिए आ चुके हैं। इनमें से 518 को इलाज अथवा देखरेख के बाद घर भेजा जा चुका है।

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इस सेंटर की खास बात है कि यहां पर आए लोगों को आईटीबीपी के फौजी अनुशासन में रखा जाता है। उन्हें दूध-दही के साथ शाकाहारी खाना दिया जा रहा है।

सिगरेट और शराब से बनाई दूरी

सेंटर के अधिकारियों और डॉक्टरों का कहना है कि 14 दिन तक क्वारंटीन में रहने वाले ये लोग पहले दिन से ही फौजी अनुशासन सीख लेते हैं और सहयोग कर रहे हैं। ये लोग विदेश में जो कुछ भी खाते-पीते रहे हों, मगर सेंटर पर ये सब पूर्ण शाकाहारी बने हुए हैं। यहां आकर लोगों ने सिगरेट और शराब से भी दूरी बना ली है।

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आईटीबीपी के इस सेंटर पर एक बार में एक हजार से ज्यादा लोगों का क्वारंटीन किया जा सकता है। क्वारंटीन सेंटर के डॉक्टरों के अनुसार, मिलान और रोम से आए सभी लोग अच्छे से रह रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा युवा हैं, जो पढ़ाई-लिखाई के लिए विदेश गए थे। शुरू से ही हर बैच को यहां शाकाहारी खाना दिया गया है।
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आईटीबीपी के फौजी अनुशासन का ये खुद दो कदम बढ़कर स्वागत कर रहे हैं। एयरपोर्ट से जैसे ही ये लोग क्वारंटीन सेंटर पर पहुंचते हैं, इन्हें इनके बैड और रूम अलॉट कर दिए जाते हैं। उसके बाद आईटीबीपी के अधिकारी और डॉक्टर इन्हें सेंटर पर कैसे रहना है और किन बातों का पालन करना है, आदि जानकारी साझा की जाती हैं।

हर व्यक्ति को एक नंबर दिया जाता है। उसी के मुताबिक, उनकी कॉल होती है। जैसे, ये बोला जाता है कि फलां नंबर वाले व्यक्ति टेस्ट के लिए आ जाएं या इतने नंबर वाले व्यक्ति चाय वाली टेबल पर पहुंचे।

कठिन ड्यूटी कर रही प्रभावित

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडे का कहना है कि ये लोग हमारे अधिकारियों, डॉक्टरों और सेंटर पर तैनात जवानों से बात करते हैं। आईटीबीपी के चुनौतीपूर्ण जॉब को लेकर उनके कई सवाल होते हैं। आप लोग कैसे बर्फ में ड्यूटी देते हैं। इन्हीं बातों से प्रभावित होकर ये लोग भी फौजी अनुशासन में बंध जाते हैं।

कुछ लोगों के मन में कोरोना का डर बना रहता है, चाहे वे पूरी तरह ठीक हैं। इनका डर भगाने के लिए मनोवैज्ञानिक और काउंसलर की मदद भी लेते हैं। बाहरी दुनिया के साथ लगातार संपर्क में हैं सेंटर पर सभी लोगों को फ्री वाईफाई मुहैया कराया गया है।

इसकी मदद से ये लोग अपने परिजनों और दूसरे लोगों के संपर्क में रहते हैं। कुछ युवा तो ऐसे भी हैं जो अपने जानकारों के पास क्वारंटीन का वीडियो बनाकर भेज देते हैं या सेंटर के इंडोर गेम की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हैं।

पिछले सप्ताह इटली के रोम से दिल्ली आए 263 लोगों में 55 महिलाएं हैं और एक बच्चा भी है। सेंटर के डॉक्टर राजकुमार बताते हैं कि ये लोग हमारी सभी बातों को मानते हैं। कई युवा ऐसे हैं जो विदेशों में नॉनवेज या हार्ड ड्रिंक लेते रहे हैं, लेकिन यहां पर वे शाकाहारी बन गए हैं। कम से कम जब तक वे यहां पर हैं, दूध, दही और फल खाते हैं।



इससे पहले बैच में आए 215 लोग भी इसी सेंटर पर हैं। ये लोग इटली के मिलान से आए थे। सभी लोग आपस में बातचीत करते हैं। वे डॉक्टरों से भी कई सवाल जवाब करते हैं। रोजाना कई बार इनकी जांच होती है। इन लोगों का आने के 14 वें दिन दूसरा टेस्ट होगा।

अगर दोनों रिपोर्ट नेगेटिव आती हैं तो उन्हें घर भेज दिया जाता है। वहां पर भी उन्हें अगले 14 दिन घर में ही क्वारंटीन में रहने की सलाह दी जाती है।

वुहान, मिलान और रोम से आए लोग हैं इस केन्द्र में आईटीबीपी के इस केंद्र पर 1023 लोगों को लाया जा चुका है

  • पहला बैच- एक फरवरी को 103 लोग वुहान से आए
  • दूसरा बैच- दो फरवरी को 303 लोग वुहान, चीन से लाए गए
  • तीसरा बैच- 27 फरवरी को 112 लोग वुहान, चीन से लाये गए
  • चौथा बैच- तीन मार्च को 21 इटालियन पर्यटक और 3 भारतीय यहां पहुंचे
  • पांचवां बैच- 15 मार्च को मिलान, इटली से 218 लोग लाये गए
  • छठा बैच- 22 मार्च को रोम, इटली से 263 लोग लाये गए
  • अब तक आईटीबीपी के इस केंद्र पर 518 लोगों सफलतापूर्वक क्वारंटीन अवधि बीतने के बाद घर भेजा जा चुका है।
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