Coronavirus: मजनू-का-टीला गुरुद्वारा में मजदूरों के रुकने की पंजाब सरकार को थी सूचना, नहीं की कोई कार्रवाई
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रमुख ने कुछ मजदूरों को अपनी बसों से पंजाब भेजा, बाकी 205 की जानकारी पंजाब सरकार को दिया। लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
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कोरोना के मामले में प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। खबर है कि उत्तरी दिल्ली के मजनू-का-टीला गुरुद्वारा में 29 मार्च से 205 लोग ठहरे हुए थे, लेकिन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से पंजाब सरकार को इसकी जानकारी देने के बावजूद इन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोई कोशिश नहीं की गई।
बाद में इसकी सूचना दिल्ली सरकार और स्थानीय पुलिस को भी दी गई, लेकिन इसके बाद भी समय रहते इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। निजामुद्दीन के मरकज में तब्लीगी जमात के 1500 से ज्यादा लोगों के एकत्र होने की खबर से हड़कंप मचने के बाद बुधवार को प्रशासन जागा और बुधवार को इन्हें नेहरू विहार के एक स्कूल में शिफ्ट किया गया।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने अमर उजाला को बताया कि मजनू का टीला गुरुद्वारे में 29 मार्च की शाम को काफी संख्या में लोग शरण लेने के लिए आये थे। ये सभी धार्मिक यात्री नहीं थे, बल्कि दिल्ली के आसपास के इलाकों में काम करने वाले पंजाब के मजदूर थे।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के शरण लेने के बाद उन्होंने कुछ बसों का इंतजाम कर इन्हें पंजाब भिजवाने का प्रयास किया। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की दो बसों और पंजाब गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की दो बसों, कुल चार बसों में लगभग 170 लोगों को पंजाब भेजा गया।
सिरसा के मुताबिक मजदूरों की संख्या ज्यादा थी और उनके पास बसें कम थीं, इसलिए 205 मजदूर गुरुद्वारा में ही रुक गये। उन्होंने इसके बाबत पंजाब सरकार को ट्वीट कर जानकारी दी और बसों की व्यवस्था कर मजदूरों को उनके घर पहुंचाने की अपील की।
पंजाब के जो लोग दिल्ली में फँसे हैं; कल हमने दो बसों द्वारा उन्हें घरो तक पहुंचाया था
अभी भी 400 से ज़्यादा पंजाब के लोग गुरुद्वारा मजनूं का टीला साहिब में पंजाब सरकार की मदद का इंतज़ार कर रहे है@capt_amarinder जी से विनती- इन लोगो को उनके घरों तक पहुँचाने का इंतज़ाम करें @ANI pic.twitter.com/32BmzjPCAn— Manjinder S Sirsa (@mssirsa) March 30, 2020
उन्होंने पंजाब सरकार के दो जिम्मेदार लोगों को भी इनके विषय में जानकारी दी थी। आरोप है कि इसके बाद भी उनसे मजदूरों को वापस ले जाने के बारे में कोई संपर्क नहीं किया गया। सिरसा ने 31 मार्च को ट्वीट कर इसके बारे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी जानकारी दी और स्थानीय पुलिस को सूचित किया।
दरअसल, इन 205 मजदूरों में सिख, हिंदू और कुछ ईसाई भी शामिल हैं। वे दिल्ली के आसपास गुरुग्राम, वजीराबाद, ओखला और अन्य औद्योगिक केंद्रों में काम करते हैं। चूंकि मजनू के टीला के पास से ही पंजाब और हरियाणा को जाने वाली बसें मिल जाती हैं, ये अपने घर जाने के लिए मजनू का टीला पहुंचे।
लेकिन कोई बस उपलब्ध न होने के कारण वे रात बिताने के लिए पास के मजनू-का-टीला गुरुद्वारा पहुंच गये। 29 मार्च से लेकर अभी तक ये मजदूर वहीं पर रुके हुए थे।
क्वारंटीन देने की अपील
गुरुद्वारा कोरोना संक्रमण के खतरे के बाद लोगों की मदद करने के मामले में सबसे आगे रहे हैं। इस गुरूद्वारा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने इस बात का प्रस्ताव रखा था कि अगर सरकार लोगों को आइसोलेट करने के लिए क्वारंटीन सेंटर बनाने के लिए जगह की तलाश कर रही है, तो वे इसके लिए जगह देने को तैयार हैं।
अरविंद केजरीवाल ने गुरुद्वारा की इस पहल का स्वागत भी किया था, लेकिन अभी तक जरूरत न पड़ने के कारण ऐसा नहीं किया गया। मजदूरों के पलायन की खबर सामने आते ही गुरुद्वारों ने भूखे लोगों को खाना खिलाने का काम भी शुरू कर दिया था। गुरुद्वारा बंगला साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज में इस समय भी भारी संख्या में डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी रह रहे हैं क्योंकि इन्हें स्थानीय लोगों के द्वारा परेशान करने का मामला सामने आया था।
इसलिए उछला मामला
निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के 1500 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने की खबर सामने आने के बाद मीडिया में यह खबर सुर्खियां बन गई। लोगों ने इस मुद्दे पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया कि जब लोगों के एक जगह पर एकत्र होने पर प्रतिबंध है तब इस तरह लोगों को इकट्ठा क्यों होने दिया गया?
इनमें से कई लोगों की तेलंगाना और अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमण से मौत भी हो गई है। इस खबर पर तीखी प्रतिक्रिया होने के बाद गुरुद्वारा मजनू-का-टीला का मामला भी लोगों की जानकारी में सामने आया और इसके बाद मजदूरों को वहां से हटाया गया।