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दिल्ली में कोरोना: कोविड शवों के अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यवाही बंद, अदालत ने कहा-समय बीतने के साथ स्थिति में आया व्यापक बदलाव
Thu, 14 Apr 2022 08:04 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 14 Apr 2022 08:04 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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उच्च न्यायालय ने 2020 में कोविड-19 के कारण मरने वालों के शवों के अंतिम संस्कार से संबंधित शुरू की गई कार्यवाही को बंद कर दिया है। अदालत ने कहा समय बीतने के साथ स्थिति में व्यापक बदलाव हो चुका है और अब इसकी प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है।
अदालत स्वयं द्वारा ही शुरू की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कोविड -19 के कारण मरने वालों के अंतिम संस्कार के लिए सुविधाओं की कमी के बारे में खबरें आने के बाद स्वयं ही जनहित याचिका शुरू की थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में कहा समय बीतने के साथ ही स्थिति में व्यापक बदलाव हो चुका है और इसलिए मौजूदा याचिका आज के संदर्भ में अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। तदनुसार हम इस स्तर पर यह कार्यवाही बंद कर रहे हैं।
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विभिन्न खबरों पर संज्ञान लेने के बाद उच्च न्यायालय ने 28 मई, 2020 को जनहित याचिका शुरू की थी जब कोविड महामारी चरम पर थी। खबरों में कहा गया था कि अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में कोविड पीड़ितों के शव अस्पतालों, मुर्दाघरों और श्मशान घाटों में पड़े हैं।
दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि स्थिति में सुधार लाने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं।
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अदालत स्वयं द्वारा ही शुरू की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कोविड -19 के कारण मरने वालों के अंतिम संस्कार के लिए सुविधाओं की कमी के बारे में खबरें आने के बाद स्वयं ही जनहित याचिका शुरू की थी।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में कहा समय बीतने के साथ ही स्थिति में व्यापक बदलाव हो चुका है और इसलिए मौजूदा याचिका आज के संदर्भ में अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। तदनुसार हम इस स्तर पर यह कार्यवाही बंद कर रहे हैं।
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विभिन्न खबरों पर संज्ञान लेने के बाद उच्च न्यायालय ने 28 मई, 2020 को जनहित याचिका शुरू की थी जब कोविड महामारी चरम पर थी। खबरों में कहा गया था कि अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में कोविड पीड़ितों के शव अस्पतालों, मुर्दाघरों और श्मशान घाटों में पड़े हैं।
दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि स्थिति में सुधार लाने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं।