नोएडा: एक सप्ताह में हुई मौतों का होगा ऑडिट, गलती मिलने पर नपेंगे चिकित्सक
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वहीं, मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर सफाई कर्मियों ने स्वास्थ्य मंत्री को घेर लिया। सफाई कर्मियों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार महज 7000 हजार रुपये थमा रहा है। जबकि उन्हें पहले अधिक पैसे मिलते थे। इस पर मंत्री ने कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया।
इसके बाद सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल पहुंचे। वहां अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों से ऑनलाइन संवाद किया। मरीजों से मिलने वाली सहूलियत के बारे में जाना। होम आइसोलेशन में जिले में 433 मरीज हैं। उन्होंने एक मरीज से ऑनलाइन बातचीत भी की।
गाजियाबाद सीएमओ की लापरवाही से स्वास्थ्य मंत्री नाराज
मंत्री के संज्ञान में आया कि मंगलवार शाम यूपी गेट बॉर्डर पर 97 लोगों की रैंडम जांच की गई। एक संक्रमित बुजुर्ग को बस में बिठाकर भेज दिया गया। इससे अन्य यात्रियों में संक्रमण का खतरा पैदा हो गया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने नाराजगी जताते हुए जवाब तलब करने की बात कही।
पर्यवेक्षकों ने भी सौंपी अपनी रिपोर्ट
जनपद में हाल में शासन से तीन पर्यवेक्षक भेजे गए थे। इनमें एक आईएएस अफसर और दो वरिष्ठ चिकित्सीय अधिकारी शामिल रहे। पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य मंत्री ने कार्रवाई की बात कही। वहीं कोरोना संक्रमण के बारे में उन्होंने कहा कि एक मरीज के सापेक्ष 15 से 25 संपर्कों की तलाश की जा रही है।
कांट्रैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने के कारण ही प्रदेश सरकार कोरोना पर काबू पाने में सफलता हासिल कर पाई है। मार्च से अभी तक प्रदेश में 5,35,335 केस हैं। इसमें 5,00,835 मामले ठीक हो गए हैं। इस समय सूबे की रिकवरी दर 94.07 है। वहीं, 7644 संक्रमितों की मौत हुई है।
डेथ ऑडिट में मिली लापरवाही तो नपेंगे चिकित्सक
जिले में एक सप्ताह में सात से अधिक मौतें हो चुकी हैं। यह आंकड़ा चिंता करने वाला है। इस पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक मौत का डेथ ऑडिट किया जा रहा है। उसमें देखा जाता है कि मरीज पहले कितने दिन से बीमार था।
होम आईसोलेशन में कब से था। अन्य तथ्यों की समीक्षा की जाती है। चिकित्सक की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।